
कृष्ण राम चौहान
श्रीगंगानगर। राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव की सरगर्मियां तेज होते ही गांवों में भावी सरपंचों की तलाश शुरू हो गई है। आरक्षण के हिसाब से दावेदार अपने राजनीतिक और सामाजिक समीकरण बैठाने में जुट गए हैं। वहीं, उन पूर्व सरपंचों और संभावित दावेदारों के लिए पुराने वित्तीय अनियमितता के मामले परेशानी का कारण बन सकते हैं, जिनके कार्यकाल में सरकारी राशि के गबन,अनियमित भुगतान या नियमों की अनदेखी के मामले जांच में सामने आए हैं। चुनावी प्रक्रिया के दौरान जरूरी दस्तावेज और एनओसी की स्थिति ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण हो सकती है।
पत्रिका पड़ताल में सामने आया है कि श्रीगंगानगर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों में करीब 2 करोड़ 89 लाख 57 हजार 275 रुपए की वसूली अब भी लंबित है। इनमें कुछ प्रकरण वर्ष 1994-95 से चले आ रहे हैं। कई मामलों में जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताएं सामने आने के बाद जिम्मेदारी तय की गई और वसूली के आदेश भी हुए, लेकिन पूरी राशि अब तक जमा नहीं हो सकी। ऐसे में पंचायत चुनाव से पहले पुराने मामलों की फाइलें और संबंधित रिकॉर्ड फिर से जांच के दायरे में आ सकते हैं।
लंबित वसूली के मामले में घड़साना पंचायत समिति सबसे ऊपर है। यहां करीब 1.39 करोड़ रुपए की वसूली अटकी हुई है। इसके बाद रायसिंहनगर में 96.75 लाख, श्रीगंगानगर में 31.73 लाख, सादुलशहर में 11.51 लाख तथा करणपुर में 10.03 लाख रुपए की वसूली लंबित है।विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार कुछ प्रकरण न्यायालयों में लंबित हैं, जबकि कुछ मामलों में विभागीय कार्रवाई, रिकॉर्ड उपलब्ध कराने, जिम्मेदारी तय करने या वसूली की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। संबंधित प्रकरणों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं।
सूरतगढ़ की रघुनाथपुरा ग्राम पंचायत में 92 निर्माण कार्यों और 23 प्रशासनिक मदों की जांच में 21 कार्मिकों को जिम्मेदार मानते हुए 48.35 लाख रुपए की वसूली की अनुशंसा की गई। साधुवाली ग्राम पंचायत में 38 निर्माण कार्यों की जांच में 11.69 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितता सामने आई।
घड़साना क्षेत्र की 2 जीएमबी और चक 7 जीडीए ग्राम पंचायत में इंटरलॉकिंग सडक़ का निर्माण किए बिना ही रिकॉर्ड में कार्य पूर्ण दर्शाकर 6 लाख रुपए से अधिक का भुगतान किए जाने का मामला सामने आया। वहीं 17 एमडी ग्राम पंचायत में सफाई, जोहड़ में पानी, मिट्टी भराई और वाटरवर्क्स से जुड़े कार्यों में 11.13 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई।
रायसिंहनगर की ठाकरी ग्राम पंचायत में नियमों की अनदेखी कर 220 से अधिक आबादी पट्टे जारी करने का मामला जांच में सामने आया। 3 ई छोटी ग्राम पंचायत में दो करोड़ रुपए से अधिक के भुगतान से जुड़े प्रकरण में रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं करने पर तत्कालीन वीडीओ के खिलाफ निलंबन, एफआइआर और विभागीय कार्रवाई की गई। सूरतगढ़ की फरीदसर ग्राम पंचायत में अधूरे अथवा बिना सत्यापन वाले विकास कार्यों को पूर्ण दर्शाकर 57.98 लाख रुपए के भुगतान का मामला भी जांच में सामने आया।
जिले की विभिन्न पंचायत समितियों में गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी पुरानी राशि लंबित है। सभी मामलों में रिकॉर्ड के आधार पर वसूली सुनिश्चित की जाएगी। दोषी कार्मिकों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। चुनाव के समय संबंधित अभ्यर्थियों की पात्रता और आवश्यक एनओसी की प्रक्रिया भी नियमानुसार ही होगी।