
Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट ने एक शिक्षिका का ट्रांसफर आदेश रद्द कर दिया है, जिसे सामाजिक विज्ञान की पात्रता होने के बावजूद अंग्रेजी पढ़ाने के लिए स्थानांतरित किया गया था। कोर्ट ने कहा कि किसी शिक्षक को उसकी शैक्षणिक योग्यता से अलग विषय पढ़ाने के लिए मजबूर करना न सिर्फ उस शिक्षक के लिए नुकसानदेह है, बल्कि यह छात्रों के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार का भी उल्लंघन है।
न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायाधीश संदीप शाह की खंडपीठ ने यह टिप्पणी श्रीगंगानगर जिले के श्रीकरणपुर निवासी शिक्षिका गौरी की विशेष अपील स्वीकार करते हुए की। गौरी का स्थानांतरण जनवरी, 2025 में अंग्रेजी विषय पढ़ाने के लिए सीनियर सेकेंडरी स्कूल में किया गया था, जबकि उनकी स्नातक में वैकल्पिक विषय इतिहास और अर्थशास्त्र थे।
खंडपीठ ने कहा कि किसी शिक्षक को ऐसे विषय के लिए नियुक्त नहीं किया जा सकता, जिसके लिए वह अर्हता नहीं रखता। यदि वह विषय ठीक से नहीं पढ़ा पाता है तो उस पर विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है, जो उसके लिए अनुचित होगा। वहीं, छात्रों को भी उस विषय में योग्य शिक्षक नहीं मिलेगा, जो उनके शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। अपीलकर्ता ने दलील दी थी कि स्नातक में अंग्रेजी केवल अनिवार्य विषय रही है, वैकल्पिक नहीं थी।
नियमों के अनुसार, किसी विषय को पढ़ाने की पात्रता तभी बनती है जब वह विषय स्नातक में वैकल्पिक के रूप में पढ़ा गया हो। कोर्ट ने शिक्षिका की दलीलों को उचित मानते हुए एकल पीठ के 4 फरवरी, 2025 के आदेश और जिला शिक्षा अधिकारी श्रीगंगानगर की ओर से जारी 9 जनवरी, 2025 के स्थानांतरण आदेश को रद्द कर दिया। खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक आवश्यकता के नाम पर ऐसे आदेशों को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता, जो सेवा नियमों और शिक्षा की गुणवत्ता के मानको के खिलाफ हो।