
Rajasthan Panchayat Elections : श्रीगंगानगर में आरक्षण की लॉटरी खुलने के बाद गांवों की सियासत भी करवट लेने लगी है। कहीं बरसों से रूठे परिवार के सदस्यों को मनाने की कोशिश चल रही है तो कहीं रिश्तेदारों और प्रभावशाली ग्रामीणों की नाराजगी दूर करने के प्रयास शुरू हो गए है। किसी गांव में जातीय समीकरण बैठाने की जोड़-तोड़ चल रही है तो कहीं दावेदारों के धड़े अपने-अपने प्रत्याशी के समर्थन में माहौल बनाने में जुट गए है। सोशल मीडिया पर समर्थन की अपीलें वायरल हो रही है और चौपालों पर संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चाएं तेज है।
पंचायतराज चुनाव के लिए जिले में जिला प्रमुख, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, पंचायत समिति प्रधान, सरपंच और वार्ड पंच पदों के आरक्षण की तस्वीर सामने आने के बाद ग्रामीण इलाकों में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई है। श्रीगंगानगर जिले की 11 पंचायत समितियों में प्रधान पदों का आरक्षण तय हो चुका है, जबकि 409 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच पदों के आरक्षण की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है।
आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होते ही कई गांवों में उन चेहरों ने फिर सक्रियता बढ़ा दी है, जो लंबे समय से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। कुछ जगह आरक्षण ने पुराने दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया तो कई जगह नए चेहरों के लिए मैदान खुल गया। अब दावेदार केवल अपने परिवार और समर्थकों तक सीमित नहीं है। किसके साथ कौन-सा परिवार है, किस बिरादरी का कितना प्रभाव है और किस धड़े का गांव में कितना आधार है। इसी गणित को बैठाने की कवायद शुरू हो गई है।
चुनाव में एक-एक वोट की अहमियत को देखते हुए परिवारों के पुराने मतभेद भी दूर करने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। कई जगह संभावित प्रत्याशी अपने रिश्तेदारों और पुराने समर्थकों से संपर्क साध रहे हैं। कहीं शादी-ब्याह और सामाजिक कार्यक्रमों के बहाने मेल-मुलाकात बढ़ी है तो कहीं लंबे समय से बंद बातचीत फिर शुरू हो गई है।
जिन ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए दावेदारों की संख्या ज्यादा है, वहां गांव के अलग-अलग धड़े अपने पसंदीदा प्रत्याशी को आगे बढ़ाने में जुट गए हैं। कुछ जगह तो समर्थकों ने प्रत्याशी तय कर सोशल मीडिया पर समर्थन की अपील तक शुरू कर दी है। व्हाट्सऐप ग्रुप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर संभावित उम्मीदवारों के पक्ष में पोस्ट और संदेश दिखाई देने लगे हैं।
ग्रामीण राजनीति में सबसे ज्यादा उत्सुकता सरपंच पद को लेकर दिखाई दे रही है। गांव की राजनीति में सीधे प्रभाव वाले इस पद के लिए दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। कई गांवों में संभावित उम्मीदवार अभी से लोगों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में जुटे हैं। सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी बढ़ाने से लेकर ग्रामीणों से व्यक्तिगत संपर्क तक हर स्तर पर तैयारी दिखाई देने लगी है।
ग्रामीण चुनाव में राजनीतिक दल भी अपने स्तर पर संभावित चेहरों की जानकारी जुटाने में लगे हैं। भाजपा और कांग्रेस की ओर से ऐसे दावेदारों का फीडबैक लिया जा रहा है, जिनके स्थानीय स्तर पर सामाजिक और राजनीतिक समीकरण मजबूत माने जाते हैं। पार्टी स्तर पर भी केवल सक्रिय कार्यकर्ता होना पर्याप्त नहीं माना जा रहा। किसकी गांव में पकड़ है, कौन अलग-अलग समूहों को साथ ला सकता है और किसकी स्वीकार्यता ज्यादा है। इन पहलुओं पर फीडबैक जुटाया जा रहा है।