Hetram Beniwal : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और संगरिया के पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल का निधन हो गया। उनकी अंतिम यात्रा उनके पैतृक गांव 8 एलएनपी में आज मंगलवार को निकलेगी। जानें उनके बारे में।
Hetram Beniwal : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और संगरिया के पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल (94 वर्ष) का निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे। सोमवार रात करीब सवा ग्यारह बजे शहर के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनको तीन दिन पहले हीमोग्लोबिन की कमी के कारण भर्ती करवाया गया था। ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद उनको हैवी निमोनिया हो गया था। उनकी अंतिम यात्रा उनके पैतृक गांव 8 एलएनपी में मंगलवार को निकलेगी।
श्रीगंगानगर में माकपा के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल सादुलशहर और श्रीगंगानगर क्षेत्र से लंबे समय तक सक्रिय रहे। हेतराम बेनीवाल किसानों और मजदूरों के अधिकारों की बुलंद आवाज थे। उन्होंने घड़साना किसान आंदोलन सहित अनेक जन आंदोलनों का नेतृत्व किया। अपने संघर्षों के चलते लगभग छह वर्ष जेल में भी बिताए।
हेतराम बेनीवाल के राजनीतिक जीवन की पहचान कृषि, पानी और स्थानीय मुद्दों पर अडिग रुख रही। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। विभिन्न राजनीतिक संगठनों और सामाजिक संगठनों ने उन्हें 'जन संघर्षों का सच्चा योद्धा' बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
दुबले-पतले, करीब छह फीट लंबे हेतराम बेनीवाल का व्यक्तित्व भले ही साधारण दिखाई देता था, लेकिन भीतर जनसंघर्ष की ऐसी आग थी, जो आंदोलनों में नई ऊर्जा भर देती थी। वे हुंकार भरते तो मानो आंदोलन की दिशा तय हो जाती।
जिला मुख्यालय से लेकर घड़साना तक जब भी किसानों या आमजन का आंदोलन हुआ, हेतराम बेनीवाल अग्रिम पंक्ति में नजर आए। पीड़ितों के मसीहा बनकर वे हर मोर्चे पर डटे रहे। किसानों की भीड़ के बीच उनकी आवाज गूंजती तो आंदोलन को नया जोश मिल जाता। संघर्ष को संगठित कर आगे बढ़ाने की अद्भुत क्षमता उनमें थी।
हेतराम बेनीवाल का जन्म 10 जून 1934 को सुखचेन (पंजाब) में हुआ। बीकानेर के डूंगर कॉलेज से स्नातकोत्तर एमए तक पढ़ाई की। किसान व मजदूर नेता हेतराम बेनीवाल ने संगरिया विधानसभा क्षेत्र से माकपा की टिकट पर पहली बार 1967 में चुनाव लड़ा था। 1977 का चुनाव टिकट नहीं मिलने के कारण नहीं लड़ा।
1971-72 के दौरान IGNP के प्रथम चरण के जमीन आवंटन को लेकर चले आंदोलन में भी उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। इनकी वजह से तत्कालीन सीएम मोहनलाल सुखाड़िया की सरकार को झुकना पड़ा था। 2003 में वसुंधरा सरकार को झुकाया था।