श्री गंगानगर

Success Story: 600 रुपए से शुरू हुआ सफर, आज 280 ट्रकों के मालिक राजस्थान के रमेश; सैकड़ों लोगों को दे रहे रोजगार

राजस्थान के अनूपगढ़ क्षेत्र के रमेश कुमार सैन जेब में महज 600 रुपए लेकर गुजरात के सूरत शहर पहुंचे। वहां उन्होंने कई रातें रेलवे स्टेशन पर बिताईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आज वही रमेश सैकड़ों लोगों को रोजगार दे रहे हैं।
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रमेश कुमार सैन
रमेश कुमार सैन. Photo Patrika

अनूपगढ़/पत्रिका न्यूज नेटवर्क। जिंदगी कभी-कभी ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है, जहां हार मानना आसान और संघर्ष का रास्ता चुनना कठिन होता है। राजस्थान के अनूपगढ़ क्षेत्र के चक 86 जीबी निवासी रमेश कुमार सैन ने वर्ष 2002 में ऐसा ही फैसला लिया। जेब में महज 600 रुपए लेकर वे गुजरात के सूरत शहर पहुंचे। वहां न रहने का ठिकाना था और न रोजगार। कई रातें रेलवे स्टेशन पर बिताई और वड़ा पाव खाकर गुजारा किया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आज वही रमेश गुजरात में फास्ट ट्रैक कोरियर एंड कार्गो सहित 2 कंपनियों का संचालन कर रहे हैं और सैकड़ों लोगों को रोजगार दे रहे हैं।

रमेश का जन्म साधारण परिवार में हुआ। आर्थिक तंगी के कारण वर्ष 1996 में परिवार चक 86 जीबी से खाजूवाला चला गया। पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी और परिवार का सहारा बनने के लिए उन्होंने एक जनरल स्टोर पर मात्र 300 रुपए प्रतिमाह वेतन पर काम शुरू किया। इसी दौरान उनका विवाह भी हो गया, लेकिन सीमित आय से परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल था। बेहतर भविष्य की तलाश उन्हें वर्ष 2002 में सूरत ले गई।

अपने कार्गो ट्रक के साथ रमेश कुमार सैन. Photo- Patrika

शुरुआती दिनों में काम नहीं मिला। साथ गए दोनों दोस्त वापस लौट आए, लेकिन रमेश डटे रहे। स्टेशन पर ही नहाना-धोना और रात बिताना उनकी मजबूरी बन गई। वर्ष 2003 में सुभाष नामक व्यक्ति की मदद से उन्हें एक कोरियर कंपनी में 1,800 रुपए मासिक वेतन पर नौकरी मिली। उनका काम सूरत से मुंबई जाकर कोरियर लाना था। इसी दौरान उन्होंने कोरियर कारोबार की बारीकियां सीखीं।

वर्तमान में दो कंपनियों के मालिक

बाद में एक निजी बैंक से कोरियर ढुलाई का काम मिला। इस काम में उन्हें रोजाना एक हजार रुपए तक मिलने लगे। उन्होंने इस अवसर को कारोबार की नींव बना लिया। समय की पाबंदी, ईमानदारी और भरोसे के बल पर उन्होंने अपनी कोरियर कंपनी स्थापित की।

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इसके बाद परिवहन क्षेत्र में कदम रखा। कुछ वाहनों से शुरू हुआ सफर आज करीब 280 ट्रकों और भारी वाहनों तक पहुंच चुका है, जो देश के विभिन्न राज्यों में सेवाएं दे रहे हैं। सितंबर में उनके बेड़े में एक नामी कंपनी के 80 नए ट्रक भी शामिल होने वाले हैं। वर्तमान में वे दो कंपनियां संचालित कर रहे हैं।

परिवार बना ताकत

रमेश का कहना है कि कठिन दौर में पत्नी और परिवार का भरोसा उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। उनका मानना है कि कारोबार की असली सफलता केवल मुनाफा कमाने में नहीं, बल्कि लोगों को रोजगार देने में है। आज उनकी कंपनियों से सैकड़ों परिवार जुड़े हैं और उनका लक्ष्य भविष्य में और अधिक युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना है।

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