श्री गंगानगर

Rajasthan : एक ने छोड़ा कारोबार, दूसरे ने शानदार नौकरी; चुनी भक्ति की राह, पढ़ें श्रीगंगानगर के 2 युवाओं की प्रेरक कहानी

Rajasthan : राजस्थान के श्री गंगानगर के 2 युवाओं की प्रेरक कहानी पढ़ें। एक ने कारोबार छोड़ा, दूसरे ने शानदार नौकरी और फिर भक्ति की राह चुनी।
2 min read
sri ganganagar 2 young mukunda das and lalit balana inspiring stories read
Sri Ganganagar : मुकुंद दास और ललित। फोटो पत्रिका

Rajasthan : समाज में एक नया बदलाव आ रहा है। आज जब युवा बेहतर करियर, कारोबार और सुख-सुविधाओं की तलाश में रहते हैं, वहीं दो युवाओं ने सांसारिक जीवन से अलग राह चुनकर अपना जीवन प्रभु भक्ति और सेवा को समर्पित कर दिया। युवाओं की इस नई सोच नए बदलाव की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। अनूपगढ़ के ललित बलाना ने चलता हुआ कारोबार छोड़ वृंदावन को अपना ठिकाना बना लिया, जबकि सादुलशहर निवासी आदिवीर मुकुंद दास ने बीटेक के बाद अच्छी कंपनी की नौकरी और गृहस्थ जीवन त्यागकर प्रभु सेवा का मार्ग चुना। जन्माष्टमी के अवसर पर सामने आई दोनों की जीवन यात्राएं त्याग, भक्ति और आत्मिक शांति की प्रेरक कहानी बयां करती है।

ललित बलाना बनें ललित मोहिनी शरण

श्री गंगानगर के अनूपगढ़ के वार्ड 26 निवासी ललित बलाना ने राधारानी की भक्ति में अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली और ललित मोहिनी शरण नाम धारण किया। प्रेमानंद महाराज वृंदावन में रहते हैं और राधा वल्लभ सम्प्रदाय से जुड़े हैं। वे राधा-कृष्ण की भक्ति (खासकर राधा की प्रधानता) पर जोर देते हैं। उनके कई शिष्य सांसारिक जीवन छोड़कर भक्ति और सेवा का मार्ग अपनाते हैं। ललित मोहिनी शरण भी इन्हीं शिष्यों में से एक हैं।

आदिवीर मुकुंद दास ने छोड़ा नौकरी और गृहस्थ जीवन

वहीं, सादुलशहर निवासी आदिवीर मुकुंद दास ने बीटेक करने के बाद अच्छी कंपनी की नौकरी और गृहस्थ जीवन के बजाय प्रभु सेवा को चुना। वे वर्ष 2011 के अंत में इस्कॉन संस्था से जुड़े और तब से समर्पित ब्रह्मचारी के रूप में सेवाएं दे रहे है। वर्तमान में वे जोधपुर इस्कॉन मंदिर से जुड़े हैं। आदिवीर मुकुंद दास लोगों को सनातन धर्म से जोड़ने के ललित साथ श्रीमद्भगवद्‌गीता और श्रीमद्भागवत की शिक्षाओं के माध्यम से भक्ति और सात्विक जीवन का संदेश दे रहे हैं। वे रविवार के विशेष सत्रों और गृह कार्यक्रमों में जाकर लोगों से संवाद करते हैं। यह ज्ञान और प्रचार सेवा निःशुल्क की जाती है।

उनका कहना है कि गुरुजनों और संतों के सान्निध्य में आत्मा और ईश्वर के वास्तविक संबंध का ज्ञान होने पर भौतिक जीवन की अस्थायीता का बोध होता है। दोनों युवाओं की जीवनशैली आज की युवा पीढ़ी के लिए भक्ति, आत्मिक शांति और निस्वार्थ सेवा की प्रेरक मिसाल है।

Updated on:
04 Sept 2026 03:31 pm
Published on:
04 Sept 2026 03:31 pm
Also Read
View All