
Iran-Israel War: ईरान-इजराइल के बीच शुरू हुई यह जंग अब पूरे खाड़ी देशों को अपने चपेट में ले लिया है। इस युद्ध में अपना सर्वोच्च नेता खोने वाला ईरान इजराइल के साथ अमेरिकी ठिकानों पर जमकर बमबारी कर रहा है। इन सब के बीच भारतीय लोग भी वहां पर खौफ के साए में जीने के लिए मजबूर हैं। सुरक्षा कारणों से सभी उड़ानों को रद्द कर दिया गया है, जिसकी वजह से जो भारतीय जहां पर है वहीं पर फंसा हुआ है। इसी दौरान ईरान में फंसी एक एमबीबीएस की छात्रा के पिता का बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह कह रहे हैं कि उनकी बेटी ईरान में है और वह बम के धमाकों की वजह से सो नहीं पा रही है। दूसरे देश की धरती पर वह बेहद डरी हुई है। छात्रा की चिंता जताते हुए उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि उनकी बेटी को कैसे भी करके भारत वापस लाया जाए।
आपको बता दें कि पीटीआई से बात करते हुए MBBS करने वाली छात्रा के पिता शकील ने कहा है कि उनकी बेटी ईरान में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है और उसका छठा सेमेस्टर हाल ही में शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने बेटी को मेडिकल की पढ़ाई के लिए ईरान भेजा था, तब उन्होंने कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि वहां हालात इतने भयावह हो जाएंगे। मौजूदा हालात में लगातार हो रहे धमाकों और मिसाइलों की आवाजों ने वहां रह रहे छात्रों, खासकर लड़कियों की जिंदगी को दहशत में डाल दिया है। शकील अहमद के मुताबिक, उनकी बेटी ने फोन पर बताया कि तेज धमाकों और सायरनों की आवाज के कारण रात भर नींद नहीं आती और हर पल डर बना रहता है।
दिल्ली के रहने वाले शकील अहमद ने बताया कि शुक्रवार सुबह उनकी बेटी ने फोन पर बताया कि पास में हुए एक तेज धमाके के बाद उसके हॉस्टल की छत से प्लास्टर गिर गया, जिससे सभी छात्राएं बुरी तरह घबरा गईं। उन्होंने कहा कि ईरान में मौजूदा हालात बेहद डरावने हैं और लगातार धमाकों की वजह से बच्चों में डर बैठ गया है। शकील ने बताया कि उनकी बेटी ने NEET क्वालिफाई किया था, लेकिन भारत में एमबीबीएस की पढ़ाई बेहद महंगी होने के कारण उन्हें मजबूरी में बेटी को ईरान भेजना पड़ा। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले इजराइल-ईरान तनाव के दौरान भारत सरकार ने छात्रों को सुरक्षित निकालने में मदद की थी।
शकील अहमद ने केंद्र सरकार से अपील की कि रूस-यूक्रेन युद्ध के समय दिए गए विशेष प्रावधानों की तरह इस बार भी NMC नियमों में अस्थायी राहत देकर छात्रों को किसी सुरक्षित देश में शिफ्ट होने या बिना नुकसान के पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर देश में किफायती मेडिकल कॉलेज और पर्याप्त सीटें होतीं, तो अभिभावकों को अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश नहीं भेजना पड़ता।