
ED Action: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बहुचर्चित डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड (डीएमएफ) और भारतमाला परियोजना से जुड़े कथित घोटाले की जांच के तहत मंगलवार को छत्तीसगढ़ के कई शहरों में व्यापक छापेमारी की कार्रवाई की। इस कार्रवाई के तहत रायपुर, धमतरी, अंबिकापुर, कोरबा और दुर्ग स्थित एग्रो कारोबारियों तथा ठेकेदारों के ठिकानों को जांच के दायरे में लिया गया। जानकारी के अनुसार, ईडी की टीम ने रायपुर के वल्लभ नगर में एग्रो कारोबारी शाश्वत लुणावत और प्रकाश सालुंगे के ठिकानों पर छापा मारा। वहीं धमतरी के आमापारा क्षेत्र में ठेकेदार दीपेश गांधी के निवास और कार्यालय की जांच की गई। अंबिकापुर में कांग्रेस नेता और कृषि विभाग के बड़े सप्लायर राकेश गुप्ता की फर्म 'मानसून एग्रो' भी ईडी की कार्रवाई के केंद्र में रही।
बताया जा रहा है कि करीब 30 सदस्यीय ईडी टीम ने इन सभी स्थानों पर एक साथ कार्रवाई करते हुए घरों, कार्यालयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में मौजूद दस्तावेजों की जांच शुरू की। टीम वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड, कंप्यूटर डेटा, सरकारी टेंडरों से संबंधित दस्तावेज, सप्लाई से जुड़ी फाइलें और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बारीकी से जांच कर रही है।
प्राथमिक जांच में डीएमएफ फंड के उपयोग और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसी को जमीन की रजिस्ट्री, मुआवजा वितरण और बैंक खातों के ट्रांजेक्शन में भी कथित गड़बड़ियां मिलने की जानकारी सामने आई है। ईडी इन सभी दस्तावेजों को खंगालकर वित्तीय प्रवाह और लेनदेन के पैटर्न को समझने का प्रयास कर रही है।
सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनाए गए डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड, विशेष रूप से कोरबा जिले के डीएमएफ फंड, का उपयोग नियमों के विपरीत तरीके से किया गया। आरोप है कि कुछ चुनिंदा और चहेते वेंडरों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी टेंडर आवंटित किए गए। जांच में यह भी दावा किया गया है कि सरकारी टेंडर हासिल करने के लिए संबंधित अधिकारियों और राजनेताओं को 25 प्रतिशत से लेकर 40 प्रतिशत तक का भारी कमीशन दिया गया। आरोपों के मुताबिक ठेकेदारों ने इस कथित रिश्वत की राशि को छिपाने के लिए अपने बही-खातों में इसे आवासीय खर्च के रूप में दर्ज किया था, ताकि वास्तविक भुगतान का रिकॉर्ड सामने न आ सके।
ईडी की यह कार्रवाई डीएमएफ और भारतमाला परियोजना से जुड़े वित्तीय लेनदेन की गहन जांच का हिस्सा मानी जा रही है। फिलहाल एजेंसी दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है। जांच के आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।