
सुलतानपुर. कादीपुर तहसील क्षेत्र के मोतिगरपुर ब्लॉक में पांडेय बाबा का मेला विजयदशमी के दिन लगता है, जो दो दिनों तक चलता है। जिला मुख्यालय से करीब 32 किलोमीटर दूर बलिया-लखनऊ रोड पर प्रदेश भर से बाबा के भक्त कई दिनों पहले से यहां आकर रहते हैं और बाबा के प्रताप ( महिमा ) के बारे में आल्हा गायन (सौ मन धान चढ़े बाबा के तो लरिकै कईव साल तक खांय ) करते हैं। हालांकि, आल्हा गायन अतिशयोक्ति से भरा है, लेकिन पांडेय बाबा की महिमा बखान करते समय आल्हा गायकों ने कुछ भी अतिशयोक्ति नहीं गाया है। यह सच है कि बाबा धाम में इतना धान (चावल) चढ़ता है कि उनके सेवक (पुजारी) परिवारों को खाने की कोई कमी नहीं रहती।
जनश्रुति के अनुसार, करीब 150 साल पहले कादीपुर तहसील क्षेत्र के मोतिगरपुर के पास धर मंगल पांडेय नाम के अविवाहित तपस्वी थे। दियरा राजवंश परिवार ने रघु जल्लाद से उनकी हत्या करवा दी थी। यह विवाद राजपरिवार से एक भूखंड को लेकर था। बताया जाता है कि राजपरिवार उस भूखण्ड को धर मंगल पांडेय को देना नहीं चाहता था, लेकिन धर मंगल पांडेय उस भूखण्ड को हर हाल में हासिल करना चाह रहे थे। इसी विवाद के कारण राजपरिवार ने धर मंगल पांडेय की हत्या करा दी। बताया तो यह भी जाता है कि मौत से पहले धर मंगल पांडेय ने राजपरिवार के विरोध में कई महीनों तक खाना-पीना छोड़ दिया था।
बाबा ने कहा था- मैं अत्याचारी राजपरिवार को खत्म कर दूंगा
जनश्रुतियों के अनुसार, जिस समय धर मंगल पांडेय ने खाना-पीना छोड़ा था, उसी समय राजपरिवार की एक बहू रात में चुपके से उन्हें दूध पिलाने आया करती थी। मरने से एक दिन पहले धर मंगल पांडेय ने उस राज परिवार की बहू से कहा कि मैं कल तक इस दुनिया में नहीं रहूंगा, तुमने मेरी बहुत सेवा की है। तुम कल सुबह सूर्योदय से पहले अपने मायके चली जाना। एक तुम्हारा ही वंश रहेगा, यह अत्याचारी राजपरिवार को मैं खत्म कर दूंगा और वही हुआ भी। कुछ समय बीतने के बाद राजपरिवार खत्म हो गया। अब उसी महिला के वंशज हैं, जो जीवन-यापन कर रहे हैं। राजवंश का नामोनिशान मिट गया है।
देश-दुनिया में फैले हैं पांडेय बाबा के भक्त
पांडेय बाबा के नाम से मशहूर पांडे बाबा धाम में लोग अपने पशुओं और परिजनों के बेहतर जीवन, लंबी आयु और स्वास्थ्य के लिए पांडे बाबा के दरबार में आकर पूजन-अर्चन करते हैं। यहां मेला तो विजयदशमी के दिन लगता है, लेकिन भक्तों की भीड़ और मनौतियां मानने वालों की भीड़ पूरे साल भर रहती है। बाबा के स्थान पर भक्त कौड़ी और धान चढ़ाते हैं। बाबा के स्थान पर उनके भक्त कड़ाही चढ़ाते हैं।