Crime News: 'मैं बेकसूर था, मुझे मकड़जाल में फंसाया गया', कोरे कागज पर अपना दर्द लिखकर शख्स ने सुसाइड कर लिया। मामले की जांच की जा रही है।
Crime News: सुल्तानपुर के गनपत सहाय पीजी कॉलेज (Ganpat Sahai PG College) के प्रिंसिपल हत्याकांड में नया अपडेट सामने आया है। इस मामले के मुख्य आरोपी अनिल मिश्रा ने सोमवार देर शाम आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले उसने करीब ढाई पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा है, जो अब सामने आया है।
सुसाइड नोट में अनिल मिश्रा ने खुद को बेगुनाह बताते हुए लिखा है, '' मुझे मकड़जाल में फंसाया गया। मैं बेकसूर था।'' बताया जा रहा है कि अनिल मिश्रा को निचली अदालत (लोअर कोर्ट) से उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जहां से उसे जमानत मिल गई थी और वह जमानत पर बाहर था। इसी दौरान अब उसकी आत्महत्या की खबर सामने आने से पूरे मामले में एक बार फिर सनसनी फैल गई है।
मृतक अनिल मिश्रा ने अपने सुसाइड नोट में अपने बेटे और बेटी के नाम भावुक संदेश लिखा है। उसने बच्चों से कहा कि वे मन लगाकर अच्छी पढ़ाई करें, ताकि आगे चलकर कुछ बन सकें। उसने लिखा कि वे अपनी मां सुषमा का पूरा साथ दें, क्योंकि अब वही उनके लिए मां भी हैं और पिता भी, जिससे उन्हें उसकी कमी महसूस ना हो।
अनिल मिश्रा ने आगे लिखा कि वह 3 सालों तक नौकरी की तलाश में भटकता रहा। जिससे उससे कुछ पैसे मिल जाएं और वह अपने बच्चों की परवरिश ठीक से कर सके। सुसाइड नोट में बेटे को विशेष रूप से नसीहत देते हुए उसने लिखा कि जब समय खराब होता है, तो माता-पिता के अलावा कोई किसी का साथ नहीं देता। इसलिए किसी के बहकावे में ना आए। अंत में उसने भावुक शब्दों में लिखा कि वह कुछ समय के लिए ही इस दुनिया में आया था, सिर्फ अपने परिवार और बच्चों के साथ रहने के लिए।
इस मामले में ASP अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि पूरे मामले की की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि बंद कमरे से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसे कब्जे में लेकर उसकी गहन पड़ताल की जा रही है। सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
क्या था मामला?
बता दें कि 23 दिसंबर 2011 को गनपत सहाय पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रताप बहादुर सिंह की हत्या के मामले में अनिल मिश्रा का नाम सामने आया था। घटना के समय प्रताप बहादुर सिंह अपने अंगरक्षक सुरेश सिंह के साथ बैक पेपर परीक्षा की निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
इस बहुचर्चित हत्याकांड में अक्टूबर 2021 में अदालत ने 5 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं अनिल मिश्रा ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां से उन्हें अपील के दौरान जमानत मिल गई थी और वे बाहर थे।