
सूरत.
जीएसटी लागू होने के बाद लगातार व्यापार कमजोर होने और ड्यूटी ड्रॉ-बैक घटने से निर्यातकों के निराश होने के शिकायत कर रहे उद्यमियों के लिए अच्छी खबर है। केन्द्र सरकार ने ड्यूटी ड्रॉ-बैक बढ़ाने के संकेत दिए हैं। कपड़ा उद्योग के विभिन्न घटकों की समीक्षा करने के लिए ड्यूटी ड्रॉ-बैक कमेटी के चार सदस्यों की टीम सोमवार को सूरत आएगी।
सिंथेटिक रेयोन टैक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन नारायण अग्रवाल ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद सरकार ने निर्यातकों को प्रोत्साहित करने के लिए दी जाने वाली ड्यूटी ड्रॉ-बैक की राशि सात प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत कर दी थी। इससे निर्यातकों को नुकसान हो रहा था। सरकार का कहना था कि जीएसटी के माध्यम से वह पांच प्रतिशत रिफंड कर रही है। इस तरह निर्यातकों को पहले जितना ही रिफंड मिल रहा है, लेकिन उद्यमियों का कहना था कि राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के कई टैक्स ऐसे हैं, जिनका रिफंड नहीं हो रहा है। इसलिए कपड़ों की कीमत ज्यादा हो रही है। इसे गंभीरता से लेते हुए सरकार ने ड्यूटी ड्र-बैक पर पुनर्विचार करने का फैसला किया है। सोमवार को दिल्ली से ड्रॉ-बैक कमेटी के चार सदस्यों की टीम सूरत पहुंचेगी।
यार्न और फैब्रिक्स इंडस्ट्री भी आरओएसएल में शामिल होंगी
अब तक रिबेट ऑफ स्टेट लेवी योजना (आरओएसएल) में सिर्फ गारमेंट इंडस्ट्री को शामिल किया गया था। सूरत के कपड़ा उद्यमियों ने इस बारे में कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी से यार्न और फैब्रिक्स इंडस्ट्री को भी इसमें शामिल करने की मांग की थी। सरकार ने यह मांग भी मान ली है। इस स्कीम में निर्यातकों को राज्य सरकार की ओर से बिजली, पानी, नगर निगम सहित अन्य सुविधाओं पर लिए जाने वाले टैक्स के एवज में दो से चार प्रतिशत रिबेट मिल सकता है। कपड़ा उद्यमी धीरू शाह ने बताया कि यार्न और फैब्रिक्स इंडस्ट्री को आरओएसएल योजना में लेने से यहां के उद्यमियों के कपड़ों की लागत कम होगी। निर्यात बढऩे की उम्मीद है। इसके अलावा उन्होंने यार्न पर 18 प्रतिशत से ड्यूूटी घटाकर 12 प्रतिशत करने से कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत मिलने की बात कही।