सूरत

दक्षिण गुजरात में फिर बढ़ा लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा, सूरत-नवसारी में सीजन के पहले दो मरीज मिले

Leptospirosis Cases: दक्षिण गुजरात में मानसून के बीच लेप्टोस्पायरोसिस के नए मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। सूरत और नवसारी में इस सीजन के पहले दो मरीज मिलने के बाद लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।
2 min read
Aug 03, 2026
Leptospirosis Cases
चूहे से फैलती है लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी। फाइल फोटो- पत्रिका

सूरत। दक्षिण गुजरात में मानसून के रफ्तार पकड़ते ही जानलेवा बीमारी 'लेप्टोस्पायरोसिस' का प्रकोप एक बार फिर ग्रामीणों के लिए चिंता का सबब बनने लगा है। जुलाई में हुई झमाझम बारिश के बाद सूरत और नवसारी जिलों में इस सीजन के पहले एक-एक पॉजिटिव मरीज मिलने से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि दोनों ही मरीजों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

जांच में लेप्टोस्पायरोसिस की पुष्टि

जानकारी के अनुसार गत 25 जुलाई को सूरत जिले की पलसाणा तहसील के कारेली गांव निवासी 46 वर्षीय व्यक्ति को नई सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लक्षणों के आधार पर कराई गई जांच में लेप्टोस्पायरोसिस की पुष्टि हुई। वहीं एक अगस्त को नवसारी जिले के काशीवाड़ी गांव निवासी 78 वर्षीय बुजुर्ग में भी संक्रमण पाया गया, जिनका इलाज नवसारी सिविल अस्पताल में चल रहा है। चिकित्सकों ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि जलभराव वाले क्षेत्रों और खेतों में नंगे पांव जाने से बचें तथा बुखार या बदन दर्द के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें।

अभियान के दावों के बीच चुनौतियां भी

मानसून की शुरुआत से पहले क्षेत्रीय उप-निदेशक (आरडीडी) डॉ. सीआर पटेल की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में बचाव की रूपरेखा तैयार की गई थी। इसके तहत जोखिम वाले ग्रामीण इलाकों में 'कीमो प्रोफिलैक्सिस' के रूप में डॉक्सीसाइक्लिन गोलियों के वितरण और जन-जागरूकता अभियान का निर्णय लिया गया था। इसके बावजूद सीजन के शुरुआत में ही मरीज मिलने से रोकथाम के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

चूहों को मारने का अभियान बंद होने से बढ़ा खतरा

लेप्टोस्पायरोसिस का मुख्य कारक संक्रमित चूहों और जानवरों का मूत्र होता है, जो जलभराव के दौरान खेतों और रास्तों में फैल जाता है। सूत्रों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से 'एंटी-रोडेंट एक्टिविटी' (चूहा नियंत्रण अभियान) बंद होने के कारण संक्रमण का असर बढ़ने के आसार हैं।

दक्षिण गुजरात में लेप्टोस्पायरोसिस का कहर

  • 2011 का विकराल रूप : वर्ष 2011 में इस बीमारी ने अपना सबसे खतरनाक रूप दिखाया था, जब रिकॉर्ड 916 मामले आए थे और 177 लोगों की मौत हुई थी।
  • 2023 की सफलता : कड़े कदमों के चलते 2023 में केस घटकर महज 5 रह गए थे और शून्य मौत दर्ज हुई थी।
  • 2025 में फिर बढ़ा ग्राफ : चूहा नियंत्रण अभियान में सुस्ती के कारण वर्ष 2025 में 37 मरीज सामने आए और 4 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

पिछले साल 37 मामले

दक्षिण गुजरात में वर्ष 2025 के दौरान लेप्टोस्पायरोसिस के कुल 37 मामले सामने आए हैं, जबकि इस बीमारी से अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे अधिक 10 मामले सूरत जिले में दर्ज किए गए, जहां एक मरीज की मौत भी हुई। तापी और नवसारी में 9-9 मरीज मिले, हालांकि नवसारी में किसी की मौत नहीं हुई, जबकि तापी में एक मरीज की जान गई। वलसाड में 4 मामले और एक मौत दर्ज की गई। सूरत महानगरपालिका (एसएमसी) क्षेत्र में 2 मरीज मिले, लेकिन कोई मृत्यु नहीं हुई। इसके अलावा अन्य जिलों में 3 मामले सामने आए, जहां एक मरीज की मौत हुई।

Updated on:
03 Aug 2026 03:36 pm
Published on:
03 Aug 2026 03:36 pm