
सूरत
साड़ी और ड्रेस मटीरियल्स के लिए पहचाने जाने वाला सूरत का कपड़ा उद्योग अब गारमेंट उत्पादन में भी पैर जमा रहा है। यहां के गारमेंट उत्पादकों ने वेस्टर्न और ट्रेकिंग्स का उत्पादन शुरू किया है। देश की कई मंडियों में इनकी अच्छी मांग है।
सूरत का कपड़ा उद्योग धीरे-धीरे करवट बदल रहा है। साड़़ी और ड्रेस मटीरियल्स के साथ यहां के उद्यमियों ने गारमेंट में भी हाथ अजमाना शुरू किया है। सूरत में लगभग 150 गारमेंट उत्पादक हैं। सूरत पॉलिएस्टर कपड़ों का हब माना जाता है। कुछ साल पहले तक यहां के कपड़ों का इस्तेमाल अन्य राज्यों में गारमेंट उत्पादक करते थे। अब सूरत के उद्यमी खुद गारमेंट की दिशा में सक्रिय हुए हैं। अब तक यहां कुर्ती, गाउन, बॉटम, टॉप, लेगिन्स आदि का उत्पादन हो रहा था। उद्यमियों ने वेस्टर्न और ट्रेकिंग्स में भी हाथ अजमाना शुरू किया है। यह नायलोन-विस्कॉस, नायलोन-पॉलिएस्टर और नायलोन के साथ अन्य कपड़ों को मिलाकर बनाए जाते है। यहां बने वेस्टर्न की घरेलू और विदेशी बाजार में अच्छी मांग है।
दिवाली पर अच्छा व्यापार
एक ओर साड़ी और ड्रेस मटीरियल्स में मंदी का माहौल बताया जा रहा है, वहीं गारमेंट उद्यमी व्यापार अच्छा चलने की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि क्वॉलिटी काम करने वालों के लिए बाजार में हमेशा डिमांड रही है। गारमेंट उद्यमियों का कारोबार इन दिनों अच्छा है। व्यापारियों का कहना है कि गारमेंट सीधे पहनने के लिए तैयार होते हैं, जो लोग त्योहार के अंतिम दिनों में खरीदते हैं।
फिनिशिंग की चुनौती
सूरत का गारमेंट उद्योग धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसके सामने फिनिशिंग की चुनौती है। जानकारों का कहना है कि देश के कई शहरों में गारमेंट उद्योग फल-फूल रहा है। उनका सामना करने के लिए सूरत के गारमेंट उद्योग को फिनिशिंग की क्वॉलिटी पर ध्यान देना होगा।
गारमेंट उद्योग का भविष्य अच्छा
सूरत के गारमेंट उद्योग का भविष्य अच्छा है। आने वाले पांच साल में तेजी से विकास होगा। फिलहाल प्रयोग के तौर पर वेस्टर्न और ट्रेकिंग्स का उत्पादन शुरू हुआ है।
अरण नाकिपुरिया, गारमेंट उत्पादक
आगे बढ़ रहा है
गारमेंट उद्योग धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। जिनका काम अच्छा है, उन्हें अच्छे ऑर्डर मिल रहे हैं। हालांकि आर्थिक तरलता का संकट है।
शिवांग कापडिय़ा, गारमेंट उत्पादक