सूरत

VNSGU : महावीर फाउंडेशन बनना चाहता है विश्वविद्यालय

वीएनएसजीयू से मांगा एनओसी, सिंडीकेट में 3 को होगी चर्चा

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Nov 01, 2018
VNSGU : महावीर फाउंडेशन बनना चाहता है विश्वविद्यालय

सूरत.

वेसू के भगवान महावीर फाउंडेशन ने विश्वविद्यालय का दर्जा पाने के लिए वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय से एनओसी मांगा है। इस मामले को विश्वविद्यालय प्रशासन ने सिंडीकेट के एजंडा में शामिल किया है। तीन नवम्बर को होने वाली सिंडीकेट की बैठक में इस पर फैसला किया जाएगा।
भगवान महावीर फाउंडेशन के परिसर में कई महाविद्यालय चल रहे हैं। इनमें पोलीटेक्नीक, इंजीनियङ्क्षरग एंड टेक्नोलोजी, स्वामी पोलीटेक्नीक, नर्सिंग कॉलेज, आर्किटेक्चर कॉलेज, फॉर्मेसी कॉलेज, साइंस एंड टेक्नोलोजी कॉलेज, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन कॉलेज, कम्प्यूटर एप्लिकेशन कॉलेज, मैनेजमेंट कॉलेज, अरिहंत इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी कॉलेज शामिल हैं। इनमें हजारों विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। फाउंडेशन ने विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक बॉडी से मान्यता प्राप्त कर रखी है। अब फाउंडेशन विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त करना चाहता है। इसके लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। इसने वीएनएसजीयू से भी कई पाठ्यक्रमों के लिए मान्यता ले रखी है।
महासचिव चुनाव का मुद्दा भी उठेगा सिंडीकेट बैठक में महाविद्यालयों में महासचिव पद के चुनाव को लेकर सीनेट सदस्य गुजारिश करेंगे। दूसरी ओर विश्वविद्यालय में नमो टेबलेट का वितरण किया जाने वाला है, इसलिए सिंडीकेट सदस्य बैठक को जल्द निपटाने की फिराक में है। विश्वविद्यालय में लंबे समय से महासचिव पद के चुनाव को लेकर विवाद चल रहा है। कुलपति इस मामले में फैसला नहीं कर रहे हैं। इस पर फैसले का अधिकार सिंडीकेट ने कुलपति को सौंपा था। कुलपति ने इस मामले को फिर सिंडीकेट में रख दिया है। महासचिव चुनाव को लेकर कई सीनेटर कुलपति को पत्र लिख चुके हैं। इस मामले को सिंडीकेट की बैठक के एजेंडे में रखा गया है।

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कुलपति को मांग के सामने झुकना पड़ा
विवाद को लेकर व्यारा होम्योपेथी कॉलेज के प्राध्यापक डॉ.घनश्याम रावल पर कुलपति ने कार्रवाई की थी। डॉ.रावल को विश्वविद्यालय के सभी पदों के दूर कर दिया गया था। साथ ही व्यारा होम्योपेथी कॉलेज को मान्यता नहीं दी गई थी। एलआइसी की रिपोर्ट नेगेटिव होने का हवाला देकर कॉलेज को मान्यता नहीं दी गई। डॉ.रावल ने कार्रवाई के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। न्यायालय में डॉ.गुप्ता की कार्रवाई पर फटाकार लगाते हुए विश्वविद्यालय के आदेश वापस लेने का निर्देश दिया। डॉ.रावल पर की गई कार्रवाई को रद्द किया गया और उनका नाम सिंडीकेट की मतदाता सूची में भी शामिल किया गया। सिंडीकेट चुनाव में कुलपति के विरोधी दल के उम्मीदवारों की जीत के बाद व्यारा होम्योपेथी कॉलेज का मामला फिर चर्चा में आया।

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Published on:
01 Nov 2018 09:17 pm
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