टीकमगढ़ रविवार की दोपहर से खरगापुर के गर्रोली में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने एक यात्रा मां के नाम से कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में जन समर्थक मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि गर्रोली गांव की मेरी मां थी और यहा से बैलगाड़ी पर बैठकर मेरे पिता जी के घर डूडा […]
टीकमगढ़ रविवार की दोपहर से खरगापुर के गर्रोली में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने एक यात्रा मां के नाम से कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में जन समर्थक मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि गर्रोली गांव की मेरी मां थी और यहा से बैलगाड़ी पर बैठकर मेरे पिता जी के घर डूडा जाती थी। उसी रास्ते से तीन दिवसीय एक यात्रा निकाली जा रही है। पहले दिन गर्रोली से बुडेरा तक निकाली जाएगी। इस बारे भी अपने बचपन लेकर आज के बारे में लोगों को बताया।प्रवचन से लेकर राजनीति में कैसी आई।
पूर्व मंत्री राहुल सिंह लोधी ने बताया कि दोपहर ४ बजे के करीब यात्रा का शुभारंभ हुआ। कई गांव में स्वागत सम्मान, तुलादान और पुराने लोगों से मुलाकात की। बिजली पानी और अन्य मामलों में गांव के लोगों के साथ किसानों से चर्चा की। समस्याओं का निराकरण भी किया गया। स्थानीय लोगों ने भी कई प्रकार के सवाल जवाब किए। इस बड़े कापिले को खरौ, मौने का खेरा, कछियाखेरा, सूरजपुर तिराहा, देवरदा, डूडयनखेरा, लखेरी, कैलपुरा, बनेरा, बृषभानपुर, तालमऊ, गुखरई, मडखरा, बरियाखेरा के साथ अन्य स्थानों पर रोक लिया। जबरदस्ती पूर्व मुख्यमंत्री से मिले।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि मैं प्रवचन करती थी। छह महीने भारत और छह महीने विदेश में रहती थी। मेरे प्रवचन सभी को पसंद थे। मुझसे मिलने के लिए एमएलए, एमपी और वरिष्ठ नेता आते थे। उनसे बहुत कम ही मिल पाती थी। अगर मेरी मां होती तो मैं राजनीति में नहीं होती। वह राजनीति के खिलाफ थी। राजमाता सिंधिया के कहने पर राजनीति में आई। उन्होंने कहा था कि राजनीति में आओ और गरीबों और अन्याय की लड़ाई लडा।
कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि थकान को दूर करने और अन्य कार्यों को पूरा करने के लिए चुनाव नहीं लड़ा। अब आगे का चुनाव लडूंगी। जो लोग कहते है कि अब वह राजनीति से दूरी बना रही है। यह गलत है। मैं राजनीति को पसंद करती हूं और आखरी सांस तक राजनीति करती रहूंगी।
उनका कहना था कि प्रदेश सरकार एक अच्छा काम कर रही है। सौ से अधिक एकड़ में पलेरा के पास गोशाला निर्माण करा रही है। आगे निर्माण होने वाली गोशालाओं को रोककर ऐसी जिले में दो से अधिक गोशाला बनवाए। साथ ही लाड़ली बहिनों को एक-एक गाय भेंट करें। उनका कहना था कि गाय का पालन करा होगा।