टीकमगढ़

Success Story: 27 साल का संघर्ष और हुनर, विदेशी चखते हैं वंदना के बुंदेली भोजन का स्वाद, खुद चला रही होमस्टे

Success Story: पढ़ाई, कुकिंग और गाइडिंग के हुनर से आगे बढ़ी वंदना युवाओं के लिए मिसाल हैं कि किसी भी काम को मजबूत पक्ष बनाकर सफलता हासिल की जा सकती है।
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Oct 06, 2026
वंदना दुबे (Photo Source - Patrika)
वंदना दुबे (Photo Source - Patrika)

Success Story: अगर एक बार आप कुछ करने का ठान ले तो सफलता जरूर हासिल होती है। ओरछा की वंदना दुबे उन लोगों के लिए एक आदर्श है, जो अपनी असफलता के लिए परिस्थितियों का हवाला देते हैं। वंदना ने खुद के परिवार को संभालने और आर्थिक रूप से आगे जाने के लिए जो संघर्ष किया है, वह लोगों के लिए एक मिसाल बन गया है। अपने पति के साथ एक दुकान से ग्रहस्थी का सफर शुरू करने वाले वंदना आज खुद का होम स्टे चला रही है और विदेशी उनके बुंदेली भोजन के दिवाने होते दिखाई दे रहे है। वंदना बताती है कि उनका विवाह जतारा में हुआ था। 27 साल पहले वह दोनों ओरछा पहुंचे तो किराए से दो दुकानें ली। उस समय वंदना के लिए किराए का घर लेना भी मुश्किल था।

पति के सहयोग से पढ़ाई, फिर दुकान

वंदना कहती है कि उनका विवाह बहुत जल्द हो गया था ऐसे में उस समय घर के काम के बाद उनके पास पर्याप्त समय होता था। उस समय का सदुपयोग करने के लिए उन्होंने सबसे पहले अपने पति के सहयोग से अपनी पढ़ाई शुरू की और फिर पति का हाथ बंटाना शुरू किया। वंदना बताती है कि दुकान अच्छी न चलने के कारण वह पति के साथ पर्व विशेष पर चाय-नाश्ता की दुकान लगाती थी। साथ ही उन्होंने एक प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाना भी शुरू किया।

शुरू किया बुंदेली भोजन और गाइड का काम

वंदना बताती है कि उनके स्टॉल पर बनने वाली चीजों की लोग सराहना करते थे। कई बार विदेशी भी उनके बनाए समोसे, पराठा आदि की तारीफ करते थे। ऐसे में उन्हें विचार आया कि क्यों न विदेशी पर्यटकों को बुंदेली जायका परोसा जाए। यही से उनके व्यापार का टर्निंग प्वाइंट शुरू होता है। वंदना बताती है कि यह जायका लोगों को खासा पसंद आया। ऐसे में अब उन्होंने खुद का घर लेकर होम स्टे शुरू किया है और यहां पर ओपन किचन के साथ विदेशियों को बुंदेली स्वाद परोस रही है। वंदना ने अपने बढ़ते काम के साथ ही अब फ्रेंच और इंग्लिश भाषा को भी अपना लिया है।

अपने हुनर को बनाए अपना मजबूत पक्ष

वंदना युवाओं से कहती है कि काम कोई भी छोटा-बड़ा नहीं होता है। आपके पास जो हुनर है, उसे ही अपना मजबूत पक्ष बनाए। उनका कहना था कि कुकिंग और टीचिंग मेरा शौक था। इसी को मैंने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उपयोग किया। वह कहती है कि पूरे मनोयोग और लक्ष्य के साथ काम करने से सफलता जरूर मिलती है। वंदना बताती है कि 27 साल पहले वह दोनों ओरछा पहुंचे तो किराए से दो दुकानें ली।

Updated on:
06 Oct 2026 01:23 pm
Published on:
06 Oct 2026 01:23 pm