टोंक

बीसलपुर बांध:मछलियों ने किया चम्बल से बनास तक का सफर

बीसलपुर बांध से बनास नदी में दो माह से अधिक समय तक लगातार छोड़े गए पानी के कारण चम्बल नदी की मछलियों ने बनास नदी का सफर कर राजमहल, टोंक, बंथली तक पहुंच गई है।

2 min read
Oct 31, 2019
Many species of fish
राजमहल। बनास नदी की रपट पर मत्स्य आखेट का लुत्फ उठाते जयपुर से आए युवक।

राजमहल. बीसलपुर बांध Bisalpur Dam से बनास नदी Banas River में दो माह से अधिक समय तक लगातार छोड़े गए पानी के कारण चम्बल नदी Chambal River की मछलियों ने बनास नदी Fishes banas river का सफर कर राजमहल, टोंक, बंथली तक पहुंच गई है। इस बार बनास नदी में पिछले कुछ वर्षों से विलुप्त व चम्बल Extinct and Chambal में पाई जाने वाली मछली की कई प्रजातियां Many species of fish काफी तादाद में वापस नजर आने लगी है।

read more : साहित्य मंच टोडारायसिंह की ओर से पुस्तक बैंक की स्थापना की
मत्स्य आखेट से जुड़े लोगों ने बताया कि पानी के अंदर पथरिलें हिस्सों में पाई जाने वाली घेघरा, गुंछ, सिंघड़ा आदि प्रजाति की मछलियां बनास नदी से करीब एक दशक पूर्व विलुप्त हो चुकी थी, जो पिछले कुछ दिनों से बनास नदी के राजमहल, बोटून्दा, कुरासिया, नयागांव आदि गांवों के करीब बनास में वापस नजर आने लगी है।

इस बार काफी दिनों तक बनास में पानी की निकासी होने से मछलियां के पानी के विपरित बहाव में दौडऩे के कारण चम्बल से बनास नदी में पहुंचना माना जा रहा है। इसी प्रकार बांध से बनास नदी में पानी की निकासी थमने पर राजमहल में बनास नदी की रपट, शिलाबारी दह, डेढ़ कांकरी आदि जगहों पर मछली पकडऩे वालों का जमघट लगने लगा है।

मछलियां बारिश के दौरान बहाव क्षेत्र के वितरित दौड़ती है, जिससे चम्बल नदी में पाई जाने वाली विभिन्न प्रजाति की मछलियां बनास में आ जाती है। इस बार बांध से बनास नदी में काफी लम्बे समय तक पानी छोडऩे के कारण कई प्रजाति चम्बल से बनास में पहुंच गई। इससे बनास में वापिस नई प्रजाति पनपने की सम्भावना है।

read more : राशन दुकान की जांच के लिए मंत्री ने भेजी टीम, छापे के दौरान दुकान पर लटका मिला ताला
आंगनबाड़ी केन्द्र द्वितीय पंचायत की अनदेखी के कारण भवन पॉवर ग्रेड के पास हुकमपुरा रोड पर लाखों रुपए खर्च कर निर्मित किया गया था, जिसमें आंगनबाड़ी 3-4 सालों से संचालित हो रहा था। 5-6 महिने से पलाई कस्बे के अन्दर किराए के भवन में संचालित हो रही है।

इससे सरकार की ओर से लाखों रुपए खर्च कर बनाया गया भवन अनुपयोगी साबित हो रहा है। यहां कुल नामाकंन 70 है। बच्चों को समय-समय पर पोषहार दिया जाता है।

Published on:
31 Oct 2019 11:24 am