
मदर मिल्क बैंक
ममता से वंचित नवजात को मिल रहा आंचल
टोंक. मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अस्पताल में संचालित आंचल मदर मिल्क बैंक शिशुओं के लिए संजीवनी साबित हो रहा है। प्रतिदिन कई माताएं ‘पन्नाधाय’ बनकर नवजात शिशुओं को नवजीवन दे रही है। सालभर में ही १२८८ महिलाएं दूधदान कर दूसरों के एक हजार शिशुओं को लाभान्वित कर चुकी है।
इसके साथ ही यहां एकत्र १५०० यूनिट दूध दो बार में अजमेर भी भेजा जा चुका है। शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से चिकित्सा विभाग की ओर से जिला चिकित्सालयों में मदर मिल्क बैंक का निर्माण कराया गया है। टोंक में इसका संचालन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अस्पताल में किया जा रहा है। गत वर्ष २४ फरवरी से शुरू हुए मदर मिल्क बैंक में एकत्र दूध से कुपोषित व मां की ममता से वंचित शिशु का जीवन संवर रहा है।
प्रतिदिन कई माताएं मदर मिल्क बैंक पहुंचकर दूधदान करने आगे आ रही है। चिकित्सकों का भी कहना है कि मदर मिल्क बैंक शुरू होने के बाद शिशु मृत्यु दर में कमी आने के साथ कुपोषण पर अंकुश लगा है।
कई शिशुओं को मिल रहा फायदा
ऐसे शिशु जो स्तनपान नहीं कर पाते। जिनके होठ कटे-फटे हो। इसके साथ ही जन्म के साथ माता का निधन होने वाले, कम अवधि में जन्मे शिशु को मदर मिल्क बैंक दूध उपलब्ध करा रहा है। इससे बच्चें को मां का आंचल तो मिला ही है, मां भी सुकून महसूस कर रही है।
दो बार अजमेर भी भेजा
मदर मिल्क बैंक से अब तक दो बाद दूध अजमेर भी भिजवाया जा चुका है। इसमें एक बार ५०० यूनिट व दूसरी बार एक हजार यूनिट दूध शामिल है। इसका कारण है कि काउंसलर संगीता, डोनर रूम इंचार्ज मीना चौधरी, लैब इंचार्ज अनिता नामा व बैंक मैनेजर सुनिता चौधरी धात्री महिलाओं को समय-समय पर दूधदान करने के लिए प्रेरित कर रही है। इसके चलते बड़ी संख्या में सरकारी अस्पताल समेत निजी अस्पतालों से धात्रिया मदर मिल्क बैंक पहुंचकर दूधदान करने पहुंच रही है। इसी का परिणाम है कि धात्री सिमरन ने १८ बार व अनिता ने सर्वाधिक मात्रा में २८५० यूनिट दूधदान कर चुकी है।
१२८८ अब तक दूध दानदाता महिला
१८७६८५ मिलीलीटर अब तक एकत्र दूध
९९६ नवजात हुए लाभान्वित
४१३३ इन्हें मिला यूनिट दूध
३५०२ स्तनपान समस्या वाली महिलाएं
३८७९५ इनको मिला यूनिट दूध
१५०० अजमेर संग्रहण केन्द्र भेजा दूध