Rajasthan Panchayat Election 2026: चुनावी माहौल बनने के साथ ही युवाओं में पंच-सरपंच से लेकर प्रधान और जिला प्रमुख बनने का सपना जाग उठा है।
टोंक। राजस्थान में पंचायतराज और निकायों के चुनाव अप्रैल माह में होने की संभावना है। साथ ही संभावनाएं है कि मार्च के पहले सप्ताह में आचार संहिता लग जाएगी। ऐसे में चुनावी माहौल बनने के साथ ही युवाओं में पंच-सरपंच से लेकर प्रधान और जिला प्रमुख बनने का सपना जाग उठा है। गांवों और कस्बों में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई है। युवा वर्ग सक्रिय होकर अपनी दावेदारी जताने में जुट गया है।
माना जा रहा है कि इस बार दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस युवाओं पर विशेष दांव खेलेंगे। इसका संकेत पहले ही मिल चुका हैए जब युवा नेताओं को जिला अध्यक्षों की कमान सौंपी गई। संगठन स्तर पर युवाओं को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा रही है। इससे स्पष्ट है कि चुनावी मैदान में नई पीढ़ी की भागीदारी पहले से अधिक होगी।
चुनाव प्रक्रिया में बड़ा बदलाव यह है कि दो बच्चों का प्रावधान हटाने की बात चल रही है। पहले इस प्रावधान के कारण कई इच्छुक उम्मीदवार चुनाव लडने से वंचित रह जाते थे। अब इस शर्त के हटने से टिकट मांगने वाले नेताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। पंचायत स्तर से लेकर निकायों तक दावेदारों की लंबी कतार देखने को मिलेगी।
अगले माह वार्ड आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के वार्डों की संख्या पहले ही तय हो चुकी है। अब वार्डवार आरक्षण किया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उम्मीदवारों की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
गांव-गांव में चुनावी चर्चाएं शुरू हो चुकी है। युवा वर्ग सोशल मीडिया से लेकर जनसभाओं तक अपनी सक्रियता दिखा रहा है। पंचायतों में नेतृत्व की नई पीढ़ी सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं, निकायों में भी युवाओं को टिकट देने की मांग जोर पकड़ रही है।
चुनावी माहौल में अब तक यह साफ हो गया है कि इस बार युवाओं की भागीदारी पहले से अधिक होगी। प्रशासनिक तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं और चुनावी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं।
युवाओं की सक्रियता से चुनावी प्रतिस्पर्धा और अधिक रोचक होगी। गांवों में पंचायत चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि युवाओं की ऊर्जा और नए विचारों से राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव देखने को मिलेगा। निकायों में भी युवाओं की भागीदारी से संगठनात्मक ढांचे में नई सोच और कार्यशैली का समावेश होगा।
अप्रैल में होने वाले चुनावों को लेकर जिलेभर में उत्सुकता है। प्रत्याशियों की सूची और आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी समीकरण और स्पष्ट होंगे। फिलहाल युवाओं में नेतृत्व की आकांक्षा और राजनीतिक दलों की रणनीति चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।
कांग्रेस ने पंचायतराज चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है। इस बार युवाओं को अधिक मौका दिया जाएगा। साथ ही टिकट को लेकर मंथन भी किया जाएगा।
-सऊद सईवी, जिलाध्यक्ष कांग्रेस टोंक
संगठन के कर्मठ कार्यकर्ताओं को प्रमुखता से मौका दिया जाएगा। पार्टी का युवाओं पर भी फोकस रहेगा। टिकट वितरण में प्राथमिकता पार्टी कार्यकर्ता ही रहेगा, जो जमीन से जुड़ा हो।
-चन्द्रवीरसिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा टोंक
चुनाव की तैयारियां कर ली गई है। चुनाव सैल का गठन कर दिया है। उनमें अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है। पंच व सरपंच के चुनाव बैलेट से तथा पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव ईवीएम से होंगे।
-रामरतन सौंकरिया, उप जिला निर्वाचन अधिकारी व एडीएम टोंक