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टोंक। राजस्थान सरकार ने स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) के अंतर्गत चिकित्सकों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन नियमों के अनुसार अब ओपीडी में आने वाले मरीजों की पर्ची पर चिकित्सक को दवाइयां लिखते समय उनके उपयोग का कारण स्पष्ट करना होगा।
साथ ही रोगी के चिकित्सा इतिहास का संक्षिप्त विवरण भी दर्ज करना आवश्यक होगा, जिसमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अस्थमा जैसी पुरानी बीमारियों का उल्लेख किया जाएगा। मरीज की शिकायतें भी पर्ची पर अंकित करनी होंगी। यदि इनमें कोई कमी पाई जाती है तो चिकित्सक को जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा। ये नियम सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में लागू होंगे।
चिकित्सकों को मरीज की जांच के दौरान किए गए रक्त परीक्षण, इमेजिंग (एक्स-रे, एमआरआई, सीटी स्कैन), ईसीजी आदि के परिणाम भी पर्ची पर लिखने होंगे। लंबित जांच परिणाम और अनुवर्ती आवश्यकताओं का उल्लेख करना भी अनिवार्य होगा।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. लोकेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि चिकित्सकों के लिए यह आदेश परियोजना निदेशक शिपा विक्रम द्वारा जारी किए गए हैं। यदि पर्ची में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है तो चिकित्सक के खिलाफ जांच की जा सकती है। पर्ची पर चिकित्सक के स्पष्ट और बड़े अक्षरों में हस्ताक्षर आवश्यक होंगे। साथ ही विभागाध्यक्ष (एचओडी) की मुहर और हस्ताक्षर भी अनिवार्य होंगे।
चिकित्सक को किसी भी कुप्रबंधन या गलती के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा। अस्पताल के पैड पर दवा लिखते समय चिकित्सक का नाम, योग्यता और पंजीकरण संख्या अंकित करना भी जरूरी होगा। दवाओं के नाम और उनकी खुराक का समय पर अंकन होने से मरीजों को दवा समझने में आसानी होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि किस बीमारी के लिए कौन सी जांच करवाई गई है। इससे मरीजों को आवश्यक जानकारी आसानी से प्राप्त हो सकेगी।
-पर्ची पर स्पष्ट और सुपाठ्य लिखावट होनी चाहिए।
-ओवरराइटिंग से बचना होगा। यदि सुधार किया जाए तो उस पर चिकित्सक के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे।
-दवाइयों का नाम बड़े अक्षरों में लिखा जाना चाहिए।
-दवाइयों की खुराक और स्वरूप स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए।
Published on:
17 Feb 2026 02:09 pm
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