उदयपुर

Rajasthan Children Death Mystery: 25 दिन में 15 बच्चों की मौत, अंधेरे में तीर चलाता रहा विभाग; अब पहली बार पोस्टमार्टम

Children Death Rajasthan: सलूंबर जिले की लसाड़िया तहसील और प्रतापगढ़ जिले की पारसोला तहसील में 25 दिन में 15 बच्चों की मौत हो गई। सभी में एक ही तरीेका था, जिसमें पहले उल्टी और फिर मौत।

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Apr 26, 2026
घर-घर सर्वे करती टीम। पत्रिका फाइल फोटो

Salumber-Pratapgarh Children Death: सलूंबर जिले की लसाड़िया तहसील और प्रतापगढ़ जिले की पारसोला तहसील में 25 दिन में 15 बच्चों की मौत हो गई। सभी में एक ही तरीेका था, जिसमें पहले उल्टी और फिर मौत। लेकिन अब तक किसी भी मौत में पोस्टमार्टम नहीं हो पाया, इसलिए विभाग अब तक अंधेरे में तीर चला रहा है।

पहली बार शुक्रवार को पांच साल की रूसिया का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज पाए। अब इसकी रिपोर्ट आने के बाद भी कारणों की जानकारी लग सकती है। पहले भी दो बच्चों को उदयपुर तक रेफर किया था। रसिया की पोस्टमार्टम के सैंपल एफएसएल के पास है, रिपोर्ट आने में समय लगेगा।

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सीएमएचओ महेंद्र परमार ने कहा कि बच्चाें की मौत का कारण दिमाग का बुखार हो सकता है। दूसरा कारण मलेरिया भी हो सकता है। जिस तरह के लक्षण बच्चों में दिखे हैं जैसे- उल्टियां आना, तेज बुखार और सिरदर्द, दौरे पड़ना, बेहोशी होना, ये सारे लक्षण दोनों बच्चियों में दिखे हैं, पर इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी।

4 साल की आशा 8 घंटे मौत से लड़ी, माता-पिता झाड़-फूंक करवाते रहे

केस 1 आशा: गुरुवार सुबह 4 बजे खजूरी गांव में मां के पास सोई खेती और मजदूरी करने वाले तेजा भील की 5 साल की बेटी आशा को सुबह 4 बजे लगातार दो बार उल्टियां हुई। मां ने बताया कि उल्टी करने के बाद वह पेशाब करने गई, उसके बाद फिर से उल्टी हुई और पूरे शरीर में जकड़न हो गई, वह पूरी तरह से बेसुध हो गई। शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही थी, लेकिन सांसें चल रही थी। पर अस्पताल ले जाने की बजाय पिता 4 घंटे बाद पास ही किसी देवी के यहां ले गए। वहां 4 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच खड़ी रही और आखिरकार 8 घंटे बाद उसकी मौत हो गई। शाम 4 बजे उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया।

केस 2 रूसिया: शुक्रवार सुबह आशा के चाचा की बेटी रूसिया को भी सुबह 3:30 बजे इसी तरह उल्टियां हुई। 2 घंटे तक वह भी जिंदगी के लिए लड़ रही थी। उसे भी माताजी के ले गए। सुबह 6 बजे मौत हो गई। परिजन अंतिम संस्कार करने वाले ही थे लेकिन वार्ड के सदस्य ने प्रशासन को सूचना दी और अंतिम संस्कार करने से रोका। समझाइश करने के बाद परिजन मुश्किल से पोस्टमार्टम के लिए माने और बच्ची का शव ले जाने दिया।

दो भर्ती हुईं, 3 साल और 18 महीने की बच्ची में ये ही लक्षण

लसाड़िया तहसील के सीएचसी सेंटर में सुबह 10 बजे तक 2 बच्चियां भर्ती हुई। दोनों को वही लक्षण थे, जिनकी वजह से आशा और रुसिया की मौत हुई थी। पटलापुरी गांव की 18 महीने की लक्ष्मी के पिता नानालाल ने बताया, शनिवार सुबह 5 बजे दो बार उल्टी हुई। वे इसके बाद अस्पताल लेकर आए थे। यहां मौजूद डॉक्टर ने बताया कि इसकी सारी जांचें कराई हैं और अब सलूंबर जिला अस्पताल में रैफर किया है।

3 साल की अंजली को भी इसी लक्षण के बाद भर्ती कराया। उसे भी सलूम्बर रैफर किया है। अंजली के पिता उकारलाल का कहना है कि वे बरोला गांव के रहने वाले हैं। उसे रात 11 बजे तेज बुखार हुआ और सुबह 7 बजे उल्टियां हुई। इसके बाद 8 बजे लसाड़िया लेकर आए। जहां जांचें होने के बाद उसे डायरिया की पुष्टि हुई। इन दोनों बच्चियाें के अलावा छोहाघाटी गांव की 13 साल की नाती और खजूरी गांव की 15 साल की लक्ष्मी भी तेज ठंड के बाद बुखार के कारण भर्ती है।

फिर कैसा घर-घर सर्वे

सीएमएचओ महेंद्र परमार का दावा था कि 20 दिन में पूरे इलाके का सर्वे कर चुके हैं। लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं कि सूचित करें, लेकिन सूचित करना तो दूर चुपचाप अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। यह प्रशासन के उस दावे की पोल खोलता है कि पिछले 20 दिन से स्वास्थ्य विभाग की 10 टीमों के साथ ही जलदाय और पशुपालन विभाग की टीमें भी जुटी हुई हैं। ये घर- घर जाकर सर्वे के साथ लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं।

विपक्ष ने घेरा तो दौड़े-दौड़े आए मंत्री

उधर, बच्चों की मौत के मामले में शनिवार को सियासत तेज हो गई। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली दोपहर 12 बजे सलूंबर जिले के लालपुरा गांव पहुंचे। यहां हाल ही में पांच बच्चों की मौत हुई थी। उन्होंने परिजन से मुलाकात कर राज्य सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि इलाके में ऐसी त्रासदी है, तब सत्ता पक्ष का कोई भी जिम्मेदार नेता यहां सांत्वना देने तक नहीं पहुंचा है।

इसके करीब आठ घंटे बाद रात 8:30 बजे टीएडी मंत्री बाबूलाल खराड़ी कुंडा गांव पहुंचे, जहां शुक्रवार को दो बच्चों की मौत हुई थी। उन्होंने परिजन को सांत्वना दी और मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। वहीं बीएपी विधायक थावरचंद डामोर ने भी कुंडा पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

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