
उदयपुर . सवीना में रहने वाले अहमद अशरफ शेख का जीवन काफी मुश्किलों से भरा था। घिसट कर चलने, बोलने में तकलीफ और हर बात को थोड़ी देर में भूल जाने वाले अशरफ ने जब शिक्षा का दामन थामा तो उसका जीवन बदलने लगा।
एक समय था जब चित्तौडगढ़़ के कोई स्कूल उसे प्रवेश देने के लिए तैयार नहीं हुआ। एक स्कूल ने जैसे-तैसे प्रवेश दिया तो वहां पर भी कोई खास व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में वह वहां ढल नहीं पाया। बच्चे उसे चिढ़ाते रहते थे जिससे परिवार परेशान था कि आखिर करें तो क्या। अशरफ के पिता शाहनूर और मां संजीदा ने किसी की राय मान चित्तौडगढ़़ ही छोड़ दिया। वे अशरफ को लेकर उदयपुर आ गए और यहां से शुरू हुआ नया सफर।
ऑपरेशन के बाद पढ़ाई को लगे पंख
अशरफ के पैरों का नारायण सेवा संस्थान में दो बार ऑपरेशन हुआ। इसके बाद वह लडख़ड़ाकर धीरे-धीरे चलने लगा। फिर उसे समीप के एक सरकारी स्कूल में प्रवेश मिला, तो सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से उसे विशेष बच्चों की पढ़ाई भी मिली। साथ ही उसे फिजियो थैरेपी का सहारा मिला। अब अशरफ अच्छी तरह से बोलने लगा है। वह हिन्दी के साथ -साथ अंग्रेजी व गणित की बेसिक भी समझने लगा है। अशरफ अब ढंग से जवाब देता है। पत्रिका टीम जब उसके घर पहुंची तो उसने अभिवादन किया।
उदयपुर आने का निर्णय रहा सार्थक
अशरफ की माता का कहना है कि उदयपुर आने का निर्णय उसके जीवन के लिए बेहतर साबित हो रहा है। वह गाना सुनता है और गाता भी है। हर सोमवार उसे विशेष कक्षा में पढ़ाने के लिए ले जाते हैं। वहां बच्चों के साथ वह खूब खेलता है। 14 वर्ष का अशरफ अब पांचवीं कक्षा तक पहुंच गया है। उसकी उपलब्धि को लेकर परिवार में खुशी का माहौल है। विशेष शिक्षक दीपिका सिंह चंदेल ने बताया कि अशरफ में बहुत बदलाव आया है। पल-पल में भूलने की शिकायत वाला अशरफ पहले कुछ पढ़-लिख नहीं पाता था, अब वह पढ़ाई बेहतर करने लगा है।