
भुवनेश पण्ड्या / उदयपुर . विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की मंशा के अनुरूप कॉलेज स्टूडेंट्स इस शिक्षा सत्र में भी चाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) का फायदा नहीं उठा पाएंगे। उदयपुर के सुखाडि़या विवि ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य विवि व कॉलेजों के भी यही हाल हैं। सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सीबीसीएस लागू करने के निर्देश देने के बावजूद इसे पूरी तरह लागू नहीं कर पा रहे।
फिलहाल अधिकतर विवि इस प्रणाली को केवल स्नातकोत्तर में लागू कर पाए हैं, वहीं सम्बद्ध कॉलेज विज्ञान को छोड़ कर अन्य विषय इस प्रणाली के दायरे में नहीं ला पाए हैं। विवि व कॉलेज प्रबन्धन का पुराने ढर्रा आयोग की मंशा को पूरा नहीं होने दे रहा है। सीबीसीएस का मतलब है कि कोई भी विद्यार्थी किसी भी विषय में स्नातक या स्नातकोत्तर करने के दौरान कोई एक विषय को अतिरिक्त पढ़ सकता है। साथ ही इसमें डिविजन की बजाय ग्रेड आती है। सभी विवि के पाठ्यक्रमों में ७० प्रतिशत समानता हो जाएगी।
ये हैं हाल
- मोहनलाल सुखाडि़या विवि के साइंस, कॉमर्स व आट्र्स कॉलेज में इसे लागू कर दिया गया है, लेकिन सम्बद्ध कॉलेजों में विज्ञान विषय में ही इसे लागू किया गया है। इनमें वाणिज्य व कला वर्ग में एनुअल प्रणाली ही लागू है। वर्तमान में सात जिलों उदयपुर, बांसवाड़ा, सिरोही, चित्तौडग़ढ़, राजसमन्द, प्रतापगढ़ और डूंगरपुर जिले के कॉलेजों के २ लाख २० हजार विद्यार्थी इस विवि से सम्बद्ध हैं।
- राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर ने वर्ष २०११ से स्नातकोत्तर में सीबीसीएस को लागू किया है, जबकि स्नातक पर नहीं।
- कोटा विवि कोटा में केवल विज्ञान संकाय में इसे लागू किया गया है।
- महर्षि दयानन्द सरस्वती विवि अजमेर के संघटक कॉलेजों में ८ जनवरी १५ को इसे लागू किया गया है।
- महाराजा गंगासिंह विवि बीकानेर भी इसे प्रक्रिया में होना बता रहा है।
आयुक्तालय के प्रयास सफल नहीं
यूजीसी ने सीबीसीएस लागू करने के लिए 12 नवम्बर 2014 और 8 नवम्बर 2015 को निर्देश जारी किए हैं। यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रदेश के विश्वविद्यालयों में सीबीसीएस को चरणबद्ध रूप से लागू करने की आयुक्तालय कवायद कर रहा है, लेकिन फिलहाल उसे सफलता नहीं मिली है।
यहां भी शुरू नहीं
- गोविन्द गुरु विवि बांसवाड़ा, प.दीनदयाल विवि सीकर, राजर्षि भर्तहरि मत्स्य विवि अलवर, महाराजा सूरजमल बृज विवि भरतपुर में शुरू नहीं हो पाया है।
- जगदगुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विवि जयपुर में एमएड सेमेस्टर की परीक्षा में इसे लागू किया गया।
विषय चयन में परेशानी
फिलहाल सभी जगह इसे लागू नहीं किया जा सका है। जो विषय तय कर रखे हैं, वहीं विद्यार्थी अतिरिक्त विषय ले सकता है। साथ ही इसमें सेमेस्टर होते हैं, वहीं एक से दस तक की अंक की ग्रेड प्रणाली लागू होती है। कई विवि ने तो इसे बंद कर पुराना सिस्टम फिर शुरू कर दिया है।
आरसी कुमावत, परीक्षा नियंत्रक, मोहनलाल सुखाडि़या विवि उदयपुर
Published on:
9 May 2018, 12:40 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.