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उदयपुर में आदिवासियों के फर्जी बीमा क्लेम मामले में हुआ नया खुलासा, गुजरात में मरे युवक को जिंदा बताकर कर दिया बीमा

उदयपुर. गुजरात में मारे गए युवक को जीवित बताकर उसके भाई ने एक माह के बाद राजस्थान में पांच लाख रुपए का बीमा करवा दिया।
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उदयपुर

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Madhulika Singh

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Updated: 9 May 2018, 11:46 AM IST

Fraud

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मोहम्मद इलियास / उदयपुर . गुजरात में मारे गए युवक को जीवित बताकर उसके भाई ने एक माह के बाद राजस्थान में पांच लाख रुपए का बीमा करवा दिया। महज 88 दिन में ही क्लेम दावा पेश करने पर कंपनी की नींद उड़ गई। दस्तावेजों की जांच की तो वहां की पंचायत के फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र के साथ ही एजेन्टों की मिलीभगत सामने आ गई। कंपनी ने इस्तगासे के जरिए इस मामले की भूपालपुरा थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई लेकिन पुलिस ने तफ्तीश के नाम पर गत पांच माह में सिर्फ रिकॉर्ड जुटाया है।


बजाज एलाइंज लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के सरदारपुरा कार्यालय के शाखा प्रबंधक की ओर से दर्ज करवाए गए इस मामले में दो आरोपित ऋषभदेव निवासी रुचिता पुत्र राजकुमार जैन, अभिषेक पुत्र जयप्रकाश दोवरिया तथा एक गुजरात के गुंथली बालासिनोर खेड़ा निवासी विक्रम सिंह पुत्र उदयसिंह है, लेकिन पुलिस ने अब तक इनमें से किसी को गिरफ्तारी नहीं किया। गौरतलब है कि आदिवासियों के फर्जी बीमा क्लेम के मामले की अनुसंधान अधिकारी के हाथ में नाई थाना क्षेत्र के अलावा गुजरात बॉर्डर से सटे गांवों की भी ऐसी फाइल हाथ लगी है, जिसमें भारी गड़बड़झाले की आशंका जताई जा रही है।

फर्जीवाड़ा होने पर पंचायत में सुधारा रिकॉर्ड
गुजरात निवासी गोहिल हिम्मत भाई पुत्र उदयसिंह ने बीमे के लिए प्रस्ताव भेजा था। उसमें अपने भाई विक्रमङ्क्षसह को नोमिनी के रूप में मनोनीत किया। कंपनी ने गोहिल को 24 नवम्बर 2014 को 5 लाख की पॉलिसी जारी कर दी। नोमिनी विक्रम ने गोहिल की 20 फरवरी 2015 को प्राकृतिक मौत बताकर क्लेम पेश किया। पॉलिसी में उसने ग्राम पंचायत गुंथल का मृत्यु प्रमाण-पत्र भी पेश किया।

बीमित की मृत्यु महज 88 दिन के बाद ही दावा पेश होने पर कंपनी ने अनुसंधान किया। जांच में स्पष्ट हुआ कि गोहिल की वास्तविक मृत्यु बीमा तिथि से एक माह पूर्व 5 अक्टूबर 2014 को हो गई थी। पंचायत से मृत्यु प्रमाण पत्र की जांच की गई तो वह फर्जी निकला। पंचायत ने तुरंत ही मृत्यु रजिस्टर में भी सुधार कर लिया। इसके बाद कंपनी के अधिवक्ता जितेन्द्र सिंह झाला ने इस्तगासे के जरिए धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया था।


पुलिस दो बार गई गुजरात, बताया फरार
आदिवासियों के फर्जी बीमा क्लेम के मामले में जांच के दौरान ही पुलिस अनुसंधान में इस फाइल का भी खुलासा हुआ। फाइल में भूपालपुरा थाना पुलिस दो बार गुजरात गई वहां पर वह पंचायत से इसका रिकॉर्ड भी लेकर आई, लेकिन अब तक मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं की।