उदयपुर

उदयपुर : बलीचा के कचरे के पहाड़ों पर फिरेगी झाड़ू… दिवाली बाद शुरू होगी सफाई

उदयपुर के बलीचा डंपिंग यार्ड में तीन-चार साल से जमा कचरे के पहाड़ों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। अक्टूबर के अंत या दीपावली के बाद करीब छह महीने का बायोमाइनिंग अभियान शुरू होगा। ट्रॉमेल मशीन से पुराने कचरे की छंटाई और प्रोसेसिंग की जाएगी। जलने योग्य कचरे से आरडीएफ तैयार कर सीमेंट फैक्टरियों में ईंधन के रूप में भेजा जाएगा, जबकि इनर्ट सामग्री लैंडफिल में उपयोग होगी। इससे डंपिंग साइट की जमीन भी भविष्य में उपयोग योग्य हो सकेगी।
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Sep 22, 2026
balicha dumping ground
बलीचा डंपिंग यार्ड में कचरे के ढेर में फंसा ट्रैक्टर 

उदयपुर. बलीचा डंपिंग यार्ड में तीन-चार साल से जमा कचरे के पहाड़ अब गायब होंगे। राज्य सरकार की जीरो डंपसाइट पहल के तहत इन कचरे के ढेर का अक्टूबर के अंत तक या दीपावली के बाद वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। करीब छह महीने चलने वाले इस अभियान में कचरे को केवल उठाकर दूसरी जगह नहीं डाला जाएगा, बल्कि मौके पर ही ट्रॉमेल मशीन से उसकी छंटाई और प्रोसेसिंग होगी। कचरे से निकलने वाले जलने योग्य हिस्से को आरडीएफ में बदला जाएगा, जिसे सीमेंट फैक्टरियों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि बची इनर्ट सामग्री को लैंडफिल एरिया में उपयोग किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक काम शुरू होने या दीपावली के बाद मशीनें मैदान में उतारी जाएंगी। उसके बाद बलीचा की तस्वीर धीरे-धीरे बदलेगी। अभी जहां दूर से ही कचरे के बड़े-बड़े ढेर दिखाई देते हैं, वहां पुराने कचरे को प्रोसेस कर अलग-अलग श्रेणियों में निकालने का काम होगा। हालांकि इस दौरान नया कचरा आना पूरी तरह बंद नहीं होगा, इसलिए पुराने कचरे के निस्तारण के साथ वर्तमान कचरे के नियमित प्रोसेसिंग की व्यवस्था भी चालू रहेगी।

ट्रॉमेल में पहले छंटेगा कचरा

कचरे के पहाड़ को हटाने के लिए बायोमाइनिंग प्रक्रिया के तहत पुराने कचरे को मशीनों से निकालकर उसमें मौजूद सामग्री को अलग किया जाएगा। पहले कचरे को ट्रॉमेल में डाला जाएगा। ट्रॉमेल के जरिये कचरे की छंटाई और प्रोसेसिंग के बाद उपयोगी एवं अलग-अलग श्रेणी की सामग्री सामने आएगी। इस प्रक्रिया में निकलने वाला आरडीएफ ऐसा हिस्सा होगा जिसे ईंधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इसे सीमेंट फैक्टरियों तक भेजे जाने की व्यवस्था होगी। वहीं, जो सामग्री उपयोगी या जलने योग्य नहीं होगी, उसे इनर्ट के रूप में अलग किया जाएगा और निर्धारित लैंडफिल एरिया में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पुराने कचरे को एक स्थान से उठाकर दूसरे स्थान पर डालने के बजाय उसकी वैज्ञानिक प्रोसेसिंग की जाएगी। यही इस पूरी प्रक्रिया का सबसे बड़ा बदलाव होगा।

राजस्थान में 152 निकायों में होगा यह काम

राज्य सरकार ने प्रदेश के 152 नगरीय निकायों में करीब 75 लाख घनमीटर पुराने यानी लीगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए 310 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजना शुरू की है। इसका उद्देश्य वर्षों से जमा कचरे के ढेरों को बायोमाइनिंग के जरिये हटाना और डंपिंग साइट की जमीन को भविष्य में उपयोग योग्य बनाना है। राज्य स्तर पर कई नगरीय निकायों में कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं, जबकि अन्य निकायों में प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

...तो जमीन का भी होगा उपयोग

बलीचा में वर्षों से जमा कचरे के ढेर हटने से स्वच्छता के साथ ही बड़ी मात्रा में जमीन भी मुक्त होगी। डंपिंग साइट का दबाव भी कम होगा और खाली होने वाली जमीन का भविष्य में निर्धारित उपयोग किया जा सकेगा। आसपास के वातावरण पर भी सकारात्मक असर पडे़गा। लंबे समय से जमा कचरे से दुर्गंध, धूल, धुआं और अन्य पर्यावरणीय समस्याओं कई शिकायतें भी हो चुकी हैं। बलीचा डंपिंग यार्ड को लेकर तो हाइकोर्ट में भी मामला गया था।

Updated on:
22 Sept 2026 06:16 pm
Published on:
22 Sept 2026 06:15 pm