
उदयपुर/ झल्लारा. battling rural aereas एक ऐसा सख्श जिसे नाम भी नहीं चाहिए और दाम भी। कितनी ही जिंदगियों को बचा चुका है। कई घरों को उजडऩे से बचाया है। कितनी ही मां की कोख सूनी होने से बचाई तो लोगों के घरों के बुझते चिरागों के लिए 'भगवानÓ का रूप धरकर आया। बहनों के लिए ये भाई बना तो दुर्घटनाओं के बाद सड़क पर जिंदगी और मौत से जूझती जिंदगियों के लिए 'मसीहाÓ बना।
जी हां! हम बात कर रहे हैं सलूम्बर तहसील के छोटे से गांव जैताना निवासी खेमराज कलाल की, जिस पर स्थानीय क्षेत्रवासी पुलिस से भी ज्यादा भरोसा करते हैं। खेमराज की पहचान क्षेत्र में घायलों के मसीहा के तौर पर है। दुर्घटना में घायल व्यक्ति की सूचना उसके लिए रात और दिन के बीच का भेद नहीं रखती। सूचना मिलते ही कम समय में मौका स्थल पर पहुंचने वाला खेमराज अभी लोगों के विश्वास का पर्याय बन गया है। आसपुर से झल्लारा के बीच का करीब 10 किलोमीटर का इलाका ऐसा हैं, जहां के लोग दुर्घटना में घायल व्यक्ति की सूचना पहले पुलिस और रोगी वाहन 108 को देने से पहले खेमराज को इससे सूचित करते हैं। खास तो यह है कि खेमराज घायलों को चिकित्सालय पहुंचाने के लिए किसी ओर की मदद नहीं लेता, बल्कि खुद की कार से वह खून से लथपथ सख्त को चिकित्सालय पहुंचाता है। खुद दोनों हाथों के भरोसे घायल को उठाते हैं। इस सेवा कार्य में अधिकांश मौकों पर धर्मराज के कपड़े खून से सन जाते हैं। कार को भी सर्विस सेंटर में धुलाना पड़ता है। बावजूद इसके हेमराज ने सेवा कार्य शुरू होने के बाद आर्थिक कारणों की ओर पलटकर भी नहीं देखा। सुनकर आश्चर्य है कि खेमराज शारीरिक सहयोग ही नहीं बल्कि आवश्यकता के समय जरूरतमंद के उपचार में आर्थिक सहयोग भी खुद की जेब से करते हैं। वहीं जिंदगी बचाने में असफल रहने वाले मामलों में शव का कफन भी खुद की जेब से उपलब्ध कराते हैं।
पीठ थपथापती है पुलिस
जिंदगियों को बचाने वाले इस 'मसीहाÓ की सेवा भावना देखकर कई बार पुलिस के आलाधिकारी भी खेमराज की पीठ थपथापते हैं। खेमराज की सक्रियता पुलिस कार्मिकों की भी आधी समस्या का समाधान है। दुर्घटना में सड़क के बीच पड़े वाहनों को हटाने और बाधित आवागमन के समाधान को लेकर खुद के खर्च पर खेमराज यहां एक्सक्वेटर भी बुला लेते हैं। ताकि लोगों को कम से कम परेशानी हो। मंगलवार रात को दो बाइक की भिड़त में घायल चार लोगों की मौत के मामले में सक्रितया दिखाने वाले खेमराज ने गुरुवार को वृद्ध का शव निकालने में प्रयासों को यथावत बनाए रखा।
जोखिम से भी नहीं चूकता
बहादूरी के मामलों में भी खेमराज का कोई सानी नहीं। सड़क दुर्घटना के अलावा भी बारिश के दिना आपदा राहत कार्य में खेमराज का सहयोग अद्वितीय है। पानी के बहाव में अगर कोई व्यक्ति बह जाता है तो भी मौके पर मौजूद खेमराज बिना देर लगाए पानी में छलांग लगाकर लोगों को बचाने में पीछे नहीं रहता। करीब दो साल पूर्व पानगामडा रपट पर एक कार बह गई थी, जिसमें खेमराज के पहुचने से पूर्व 6 लोग पानी में बह गए थे। अन्य चार जने कार पर चढ़कर बैठे थे। यहां बिना देर लगाए तेज बहाव में खेमराज कूद गया और चार जनों को बहते पानी से सुरक्षित निकाल लाया। जैताना मोड़ पर तालाब में होने वाली दुर्घटनाओं में शामिल दर्जनभर लोगों को खेमराज ने जिंदगी दी है। battling rural aereas बीते करीब 10 साल के दौरान 700 से ज्यादा गर्भवति महिलाओं को प्रसव से पहले चिकित्सालय पहुंचाने में भी खेमराज ने सफल भूमिका निभाई है।