उदयपुर

Former Mewar Royal Family : वसीयत पर आया नया कानूनी मोड़, आरोपों को लेकर लक्ष्यराज सिंह नाराज, 12 जनवरी को होगी सुनवाई

Former Mewar Royal Family Property Dispute : मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्यों के बीच संपत्तियों को लेकर दो बहनों पद्मजा कुमारी, भार्गवी कुमारी और भाई लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ में रिश्तों की डोर तल्ख हुई। मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार में वसीयत पर नया कानूनी मोड़ आया है। इस बहुचर्चित मामले में अगली सुनवाई 12 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में निर्धारित है।
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Updated: 3 Jan 2026, 8:27 AM IST
Former Mewar Royal Family Property Dispute new legal twist on will Lakshyaraj Singh is upset allegations 12 January hearing Delhi High Court
भार्गवी कुमारी, भाई लक्ष्यराज सिंह और पद्मजा कुमारी। फोटो पत्रिका

Former Mewar Royal Family Property Dispute : मेवाड़ पूर्व राजपरिवार के दिवंगत सदस्य अरविंदसिंह मेवाड़ की वसीयत को लेकर चल रहे विवाद ने नया और संवेदनशील मोड़ ले लिया है। उनकी दोनों बेटियां- पद्मजा कुमारी और भार्गवी कुमारी ने कोर्ट में दायर याचिका में पिता की निर्णय लेने की स्थिति पर सवाल खड़े किए। आरोप लगाया कि पिता स्वस्थ नहीं थे, ऐसे में उनकी ओर से बनाई गई अंतिम वसीयत को वैध नहीं माना जा सकता।

पद्मजा और भार्गवी ने मुंबई हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा था कि वसीयत तैयार करने के दौरान पिता विवेकपूर्ण निर्णय लेने की स्थिति में नहीं थे। इसी आधार पर दोनों बहनों ने वसीयत को चुनौती दी। बेटियों ने दावा किया कि उन्हें पिता की स्व-अर्जित संपत्तियों में हिस्सा मिलना चाहिए। याचिका में जिन संपत्तियों का उल्लेख किया गया है, उनमें उदयपुर स्थित शिकारबाड़ी की जमीन, मुंबई के मेवाड़ हाउस के छठे माले का आधा हिस्सा और मुंबई स्थित दार्जिलिया हाउस सहित अन्य संपत्तियां शामिल बताई गई है।

लक्ष्यराज सिंह की तीखी प्रतिक्रिया

मामले में अरविंदसिंह मेवाड़ के पुत्र लक्ष्यराज सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कहा कि संपत्ति के लालच में बहनों ने पिता की छवि को ठेस पहुंचाई। कहा कि पिता जैसी शख्सियत को इस तरह अपमानित करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस विषय पर दोनों बहनों से आरोप और लक्ष्यराज की प्रतिक्रिया पर सवाल किया गया, तो किसी टिप्पणी से इनकार कर दिया।

निधन के एक माह पहले बनाई वसीयत

पूर्व राजपरिवार के सदस्य दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ का निधन बीते साल 16 मार्च को हुआ था। इससे 36 दिन पहले 7 फरवरी को उन्होंने अंतिम वसीयत बनवाकर उसे उपपंजीयक कार्यालय में विधिवत पंजीकृत कराया था। इस वसीयत में उन्होंने अपनी स्व-अर्जित संपत्तियों का एकमात्र उत्तराधिकारी पुत्र लक्ष्यराज सिंह को नामित किया था। वसीयत सामने आने के 15 दिन बाद ही विवाद शुरू हो गया था।

शपथ पत्र में ये तथ्य भी आए सामने

लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने हाईकोर्ट में शपथ-पत्र दाखिल कर इस बात के समर्थन में तथ्य भी रखे। बताया कि अगस्त और दिसम्बर 2024 में पद्मजा और भार्गवी ने कुछ कंपनियों के शेयर पिता को गिफ्ट किए थे, जिन्हें अरविंद सिंह मेवाड़ ने स्वयं स्वीकार किया और संबंधित गिफ्ट डीड पर हस्ताक्षर भी किए। इसके अलावा एक साल पहले दोनों बहनों ने पिता के कहने पर उन कंपनियों के निदेशक पदों से इस्तीफा भी दिया, जिनमें उन्हें अरविंदसिंह ने निदेशक नियुक्त किया था।

दिल्ली हाईकोर्ट में 12 जनवरी को सुनवाई

मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्यों के बीच संपत्तियों को लेकर शुरू हुए बहुचर्चित मामले में अगली सुनवाई 12 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में निर्धारित है। दोनों बहनों ने वसीयत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर और मुंबई हाईकोर्ट में लंबित केस दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिए।

पक्षकारों को 12 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले एक पक्ष ने मुम्बई के केस को जोधपुर स्थानांतरित करने और दूसरे पक्ष ने जोधपुर के केस को मुम्बई स्थानांतरित करने की याचिका लगाई थी।

Updated on:
3 Jan 2026, 8:27 AM IST
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