उदयपुर

Udaipur: पन्नाधाय की जाति पर विवाद, किताब में राजपूत बताने पर गुर्जर समाज ने विरोध जताकर सौंपा ज्ञापन

केंद्र सरकार की पुस्तक भारत के नारी रत्न में पन्नाधाय को खींची राजपूत वंश की क्षत्राणी बताए जाने पर गुर्जर समाज ने विरोध जताया है। समाज का दावा है कि पन्नाधाय गुर्जर थीं और ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर पुस्तक में सुधार किया जाना चाहिए।
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Aug 01, 2026
Controversy Over Panna Dhai Caste
गुर्जर समाज का कलक्टर को ज्ञापन (फोटो: पत्रिका)

Controversy Over Panna Dhai Caste: पन्नाधाय के बलिदान को पूरी दुनिया जानती है, पर अब उनकी जाति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से प्रकाशित भारत के नारी रत्न किताब में पन्नाधाय को खींची राजपूत वंश की क्षत्राणी बताया है। पन्नाधाय के बेटे का नाम भी बप्पा लिखा है। किताब सामने गुर्जर समाज ने विरोध शुरू कर दिया है। गुर्जर समाज का कहना है कि पन्नाधाय एक गुर्जरी थी। इसका प्रमाण ऐतिहासिक पुस्तकों और उदयपुर में बने स्थलों में दर्ज है।

गुर्जर समाज सेवा समिति का कहना है कि इस पुस्तक में पन्नाधाय की जीवनी और उनकी मूल ऐतिहासिक पहचान को लेकर बदलाव किए हैं। इसके बाद समिति के सभी चौखलों के प्रतिनिधियों गहरा रोष जता कलक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर तथ्यात्मक त्रुटियों को तत्काल दूर करने की मांग की। इस मौके पर गुर्जर समाज उदयपुर के अध्यक्ष नारायणलाल, उपाध्यक्ष हरीश धायभाई, कोषाध्यक्ष रामचंद्र धाभाई, संरक्षक देवनारायण धायभाई, रामचंद्र धायभाई एवं सदस्य रवि धाभाई सहित समस्त चौखलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

किताब पुरानी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अब आई

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से 2022 (आठवां पुनर्मुद्रण) में प्रकाशित पुस्तक भारत के नारी रत्न (संपादक: ऋतुश्री) हाल में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई है। इसके पेज नंबर 8 पर पन्नाधाय की जीवनी है, जिसमें उनकी जाति खीची राजपूत वंश की क्षत्राणी बताई है।

समाज का दावा-ऐतिहासिक प्रमाण गुर्जर होने का

गुर्जर समाज का दावा है कि यह कृत्य ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत और भ्रामक है। पन्नाधाय गुर्जर थी। समाज के अध्यक्ष नारायणलाल का कहना है कि हमारे पास पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण हैं। राजस्थान सरकार की ओर से प्रमाणित इतिहास के जीवंत प्रतीक हैं, जहां पन्नाधाय का वास्तविक इतिहास अंकित है। राजसमंद, चित्तौड़गढ़ में बने पन्नाधाय पैनोरमा, उदयपुर में पन्नाधाय दीर्घा और पन्नाधाय पार्क में भी पन्नाधाय को गुर्जर जाति का बताया है।

समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि ऐतिहासिक महापुरुषों और वीरांगनाओं की पहचान से जुड़े तथ्यों को सही रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि यदि किसी पुस्तक में इतिहास से जुड़ी कोई त्रुटि है तो उसे संशोधित कर सही जानकारी प्रकाशित की जाए। गुर्जर समाज ने कहा कि पन्नाधाय के त्याग और बलिदान का सम्मान सभी करते हैं लेकिन उनकी सामाजिक पहचान से जुड़े तथ्यों को भी ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर दर्ज किया जाना चाहिए। समाज ने इस संबंध में सरकार और संबंधित विभाग से उचित कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

Updated on:
01 Aug 2026 09:21 am
Published on:
01 Aug 2026 09:21 am