
Debari-Umarda Railway Track: उदयपुर। उदयपुर में रेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उत्तर-पश्चिम रेलवे (निर्माण संगठन) ने उमरड़ा से देबारी के बीच 24.78 किमी लंबे रेल मार्ग के दोहरीकरण (डबल ट्रैक) की प्रक्रिया को आगे बढ़ा भूमि अधिग्रहण शुरू कर दिया। इसके लिए केंद्र सरकार के राजपत्र में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। 467 करोड़ की परियोजना में आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण शुरू होगा। दोहरीकरण का कार्य तीन वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। परियोजना के तहत घाटावाली मां के समीप 550 मीटर लंबी नई सुरंग (टनल) भी बनेगी।
रेलवे की इस विशेष परियोजना के लिए उदयपुर और गिर्वा तहसील क्षेत्र की कुल 9.7770 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इसमें निजी, सरकारी और यूडीए की जमीन शामिल है। राजपत्र के अनुसार रेबारियों की ढाणी, देबारी, झरनों की सराय, भैंसड़ाखुर्द, डांगियों की पचोली, धोली मगरी, बेड़वास, मादड़ी पुरोहितान, आयड़, पानेरियों की मादड़ी, सवीना, एकलिंगपुरा और खेड़ा कानपुर सहित अन्य क्षेत्रों की भूमि अधिगृहीत की जाएगी। रेलवे अधिनियम के तहत भूमि अधिग्रहण प्रभावित 30 दिन में लिखित आपत्ति कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत कर सकेंगे। आपत्ति के साथ ठोस आधार बताना होगा।
परियोजना के तहत सबसे महत्वपूर्ण कार्य घाटावाली मां मंदिर के समीप किया जाएगा। यहां मौजूदा टनल के समानांतर करीब 550 मीटर लंबी नई टनल का निर्माण होगा, जो इस दोहरीकरण परियोजना का प्रमुख हिस्सा रहेगा।
उमरड़ा-देबारी के बीच डबल ट्रैक से ट्रेन क्रॉसिंग के लिए आउटर पर इंतजार नहीं करना पड़ेगा। उदयपुर आने-जाने वाली यात्री ट्रेनों की समय पालन क्षमता बेहतर। मालगाड़ी और यात्री ट्रेनों का संचालन सुगम हो सकेगा। इस रूट पर बढ़ते रेल यातायात का दबाव कम होगा। उदयपुर से नई यात्री ट्रेन की संभावनाओं को भी बल मिलेगा।
बता दें कि देबारी-उमरड़ा रेल प्रोजेक्ट को रेल मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में मंजूरी दी थी। इसके बाद सर्वे कार्य पूरा किया। मंजूरी मिलते ही रेल अधिकारियों ने भूमि अवाप्ति के लिए प्रशासन को प्रस्ताव भेजा। ऐसे में अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही दोहरीकरण का काम शुरू हो जाएगा। रेलवे इस काम पूरा करने के लिए 3 साल का लक्ष्य रखा है।