उदयपुर

राजस्थान के इस गांव में लोगों ने मनाई बारुदी होली, खनखनाई तलवारें, बंदूकों और तोपों से गूंज उठा गांव, देखें वीडियो

मेनार. कस्बे में रंगोत्सव पर जोश और रोमांच के पल दिखे। तलवारें टकरा रही थीं और तोप-बंदूकें छूट रही थी।
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Mar 04, 2018
menar ki barood ki holi celebration udaipur

मेनार. कस्बे में रंगोत्सव पर जोश और रोमांच के पल दिखे। तलवारें टकरा रही थीं और तोप-बंदूकें छूट रही थी। मौका था शौर्य पर्व जमराबीज का। यह नजारा देखने हजारो लोग उमड़े। दिनभर ओंकारेश्वर चौराहे पर रणबांकुरा ढोल बज रहा था । दोपहर 2 बजे मरीब मेनारिया समाज के 52 गांवों के मोतबिर, पंच परंपरागत वेशभूषा में मुख्य चबूतरे पर एकत्रित हुए। अम्ल कुस्लमल की रस्म हुई। जैसे जैसे दिन ढलता गया वैसे वैसे मुख्य बाजार की रौनक बढऩे लगी। मेहमानों का लवाजमा मुख्य चौराहे की ओर बढ़ रहा था।


इधर, पांचों रास्तो की मशालें तैयार हो रही थी। रात्रि पौने 10 बजे ओंकारेश्वर चबूतरे के यहां से पांचों मशालें ढोल की थाप पर पांचों रास्तों के लिए रवाना हुई। निर्धारित समय पर चौराहे से 150 मीटर की दूरी से सभी मशालें सैकड़ों ग्रामीणों के साथ निकली। चोराहे से पहले सभी मशाल मुख्य चौक से प्रवेश रास्ते पर रुक गई। बंदूकें भर के तैयार थी लेकिन आतिशबाजी जारी थी। फेरावतों, रावत समाज के इशारे पर पांचों दलों ने एक साथ एक समय पर कूच किया। यह युद्ध से नजारे जैसा था। मशाल के पीछे लवाजमे में महिलाएं सिर पर कलश लिए वीर रस के गीत गाती हुई मुख्य चौक में पहुंची।

आतिशबाजी के दौरान पांचों दल के योद्धाओं ने एक साथ हवाई फायर किया। इस दौरान चारों तरफ बंदूकों की गंूज सुनाई दी। बाद में जैन समाजजनों ने मेहमानों पर अबीर-गुलाल बरसाया और सभी आपस में गले मिले। रणबांकुरे ढोल ओंकारेश्वर चबूतरे से नीचे उतरे। ढोल की थाप पर बंदूकें दागते हुए पांचों दल एक साथ मुख्य जमरा घाटी की ओर बढ़े और जमरा घाटी पहुंच कतारबद्ध हो गए।

थम्ब चौक स्थित होली एवं शहीदों को महिलाओं ने अघ्र्य दिया। तभी युद्ध खत्म होने का एलान हुआ। बाद में ओंकारेश्वर चबूतरे के वृताकार में तलवार लिए जबरी गेर खेले।

इस दौरान आग के गोलों एवं दोनों हाथों में तलवारे लेकर हैरतअंगेज करतब दिखाए गए। जमराबीज देखने मेवाड़, मालवा, मध्यप्रदेश, गुजरात, मेवल से हजारों लोग उमड़े।

Published on:
04 Mar 2018 03:37 pm