उदयपुर

उदयपुर : ऐसा महादान… जो देता है एक साथ कई जिंदगियों को नई सांस

उदयपुर में राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर लोगों को अंगदान के लिए जागरूक किया जा रहा है, लेकिन जरूरत के मुकाबले दान अभी भी बेहद कम है। एक अंगदाता 8 लोगों को नया जीवन दे सकता है, फिर भी प्रदेश में 1,500 से ज्यादा मरीज प्रतीक्षा में हैं।
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Aug 03, 2026
अंगदान
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उदयपुर. मौत जिंदगी का अंत जरूर होती है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति अंगदान कर जाए तो वही अंत कई लोगों के लिए नई शुरुआत बन सकता है। राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर उदयपुर में आरएनटी मेडिकल कॉलेज, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और सामाजिक संस्थाओं की ओर से लोगों को अंगदान के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके बावजूद प्रदेश में जरूरत के मुकाबले अंगदान की संख्या बेहद कम है। राजस्थान राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटो) के अनुसार प्रदेश में अब तक केवल 71 मृतक अंगदाता ही सामने आए हैं, जबकि 954 किडनी, 440 लिवर और 133 हृदय प्रत्यारोपण के मरीज अब भी प्रतीक्षा सूची में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हर परिवार अंगदान के महत्व को समझे तो हजारों मरीजों को नया जीवन मिल सकता है।

उदयपुर बना जागरूकता का केंद्र

आरएनटी मेडिकल कॉलेज एवं सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में हर वर्ष अंगदान जागरूकता रैली, शपथ अभियान, सेमिनार और जनसंवाद आयोजित किए जाते हैं। आरएनटी में अब तक 2 अंगदान सफलता पूर्वक हो चुके है। मेडिकल विद्यार्थियों, नर्सिंग अधिकारियों और चिकित्सकों की टीम लोगों को ब्रेन-डेथ और अंगदान की प्रक्रिया समझा रही है। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि शहर में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन अंतिम निर्णय परिवार की सहमति पर निर्भर होने के कारण कई संभावित अंगदान नहीं हो पाते।

एक दाता, कई लोगों को जीवन

ब्रेन-डेथ के बाद एक व्यक्ति के हृदय, दोनों किडनी, लिवर, फेफड़े, अग्न्याशय और अन्य ऊतकों का उपयोग जरूरतमंद मरीजों के उपचार में किया जा सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि एक मृतक अंगदाता आठ लोगों को नया जीवन और कई लोगों को नई रोशनी दे सकता है। यही कारण है कि अंगदान को "महादान" कहा जाता है।

प्रदेश में जरूरत ज्यादा, दान कम

राजस्थान राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटो) के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में अब तक 71 मृतक अंगदाताओं से 156 ठोस अंगों का प्रत्यारोपण किया गया है। इनमें 106 किडनी, 36 लिवर, 12 हृदय, एक फेफड़ा और एक अग्न्याशय शामिल हैं। दूसरी ओर, वर्तमान में 1,527 मरीज जीवनरक्षक अंगों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अंगदान की संख्या बढ़े बिना इस प्रतीक्षा सूची को कम करना संभव नहीं है।

परिवार की सहमति सबसे अहम

डॉक्टर सुपर स्पेशलिटी अधीक्षक डॉ विपिन माथुर का कहना है अंगदान की सबसे बड़ी चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि जागरूकता है। कई परिवार भावनात्मक कारणों या जानकारी के अभाव में सहमति नहीं दे पाते। इसलिए केवल अंगदान का संकल्प लेना पर्याप्त नहीं, बल्कि अपनी इच्छा परिवार के सदस्यों को पहले से बताना भी जरूरी है।

राजस्थान में अंगदान की वर्तमान स्थिति

विवरण संख्या

कुल मृतक अंगदाता 71

कुल ठोस अंग प्रत्यारोपण 156

कुल प्रतीक्षा सूची 1,527

अब तक हुए प्रत्यारोपण

अंग संख्या

किडनी 106

लिवर 36

हृदय 12

फेफड़ा 1

अग्न्याशय 1

किन अंगों का सबसे ज्यादा इंतजार

अंग कुल मरीज सक्रिय मरीज

किडनी 954 942

लिवर 440 434

हृदय 133 126

अंगदान: जरूरी बातें

- एक मृतक अंगदाता 8 लोगों को नया जीवन दे सकता है।

- नेत्रदान से दो लोगों की रोशनी लौटाई जा सकती है।

- ब्रेन-डेथ के बाद परिवार की सहमति मिलने पर ही अंगदान संभव होता है।

- अंगदान पूरी तरह कानूनी और वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत किया जाता है।

अंगदान किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। एक अंगदाता कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दे सकता है। आरएनटी मेडिकल कॉलेज जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इस महादान के लिए प्रेरित कर रहा है।

डॉ. राहुल जैन, प्राचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज

Updated on:
03 Aug 2026 05:56 pm
Published on:
03 Aug 2026 05:56 pm