
उदयपुर . आदिवासियों का बीमा कर फर्जी क्लेम उठाने के गड़बड़झाला में अब तक पुलिस की तफ्तीश में मुख्य रूप से नाई सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के मेल नर्स डालसिंह की भूमिका सामने आई है। पुलिस ने मेलनर्स के कृत्यों को खुलासा करते हुए अब तक की तफ्तीश की रिपोर्ट एसपी को सौंपी है। एसपी ने इसे संभागीय आयुक्त को प्रेषित की, जहां से यह राज्यपाल को भिजवाई गई। रिपोर्ट में बताया कि आदिवासी परिवारों को सरकारी योजनाओं का प्रलोभन देकर मेल नर्स ने लाखों रुपए के बीमे कर क्लेम राशि में गड़बडिय़ां की।
पुलिस ने रिपोर्ट में उल्लेख किया कि मेलनर्स डालसिंह को इलाज करवाने आने वाले भोले-भाले आदिवासियों की गंभीर बीमारियों का पता था। उसे यह भी मालूम था कि निकट भविष्य में उनकी मृत्यु निश्चित है इसीलिए वह उनका बीमा करता था। ग्रामीणों को वह सरकारी योजनाओं में भला करवाने का लालच देकर उनके फॉर्म भरवाता और इसी बहाने बीमा पॉलिसियों के कागज तैयार कर लेता था। विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाकर चेक बुक, विड्रोल फार्म, एटीएम आदि निकलवा कर अपने पास रख लेता था। मौत होने पर वह संबंधित परिवार में शोक जताने पहुंच जाता था तथा सहानुभूति स्वरूप उन परिवार की छोटी-मोटी आर्थिक मदद करते हुए उनके नाम से लाखों रुपए के बीमा क्लेम की राशि उठा लेता था।
राजस्थान पत्रिका ने गत 30 मार्च के अंक में ‘जिनके खाने के लाले उनके नाम पर उठा लाखों का बीमा क्लेम’ शीर्षक से खबर प्रकाशित करने के बाद लगातार नए खुलासे किए। पुलिस ने भी जांच के बाद आरोपितों के विरुद्ध चोकडिय़ा (नाई) निवासी पुष्पा पत्नी रामा गमेती की रिपोर्ट पर मेल नर्स डालसिंह, दलाल रमेश चौधरी, बीमा एजेन्ट दिलीप मेघवाल व पूर्व उपसरपंच शंकरलाल के विरुद्ध मामला दर्ज किया। अभी परिवादिया के साथ ही सभी आरोपित फरार हैं।
पुष्पा के पति के नाम थी तीन पॉलिसी
पुलिस ने जांच में बताया कि परिवादिया पुष्पा के पति की सर्पदंश से मौत बताई गई। इसके नाम से मेल नर्स ने तीन पॉलिसी करवाई है। एक पॉलिसी का पैसा उठ गया। दो पॉलिसी में कंपनी ने विरोध प्रकट कर रोक दी। कंपनी ने अन्य कंपनी में पूर्व की कोई पॉलिसी का ब्योरा मांगा था, जिसे छिपाते हुए आरोपितों ने अन्य कम्पनी में दो और पॉलिसी करवा दी। इसके चलते दो पॉलिसी का पैसा नहीं उठ पाया।
रिकॉर्ड में फिर घूमा दिया बीमा कंपनी ने
पुलिस ने बताया कि बीमा कंपनियों ने अब तक 20 बीमित परिवारों के रिकॉर्ड दिए। इनमें से महज पांच व्यक्तियों के रिकॉर्ड काम हैं। कंपनी ने इन रिकॉर्ड में बीमित मृतक का एक भी रिकॉर्ड नहीं देकर फिर गुमराह कर दिया। उनसे पूछा गया था कि किस-किस का बीमा उठा एवं बीमित की मौत के बाद राशि किसके खाते में गई। रिकॉर्ड में गुमराह करने पर पुलिस ने उन्हें एक और नोटिस जारी किया है।