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Gender Economic Equality : ईक्वल सैलेरी को लेकर सोच बदलने की है जरूरत

सोशल मीडिया पर चल रहे हैं विभिन्न कैम्पेन
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उदयपुर

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Madhulika Singh

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Updated: 21 Apr 2018, 11:57 PM IST

salary equality

उदयपुर . दुनियाभर में इन दिनों ईक्वल सैलेरी की बहस छिड़ी हुई है। वर्कप्लेस पर बराबरी को लेकर कई लोग खुलकर बात कर रहे हैं। ना सिर्फ सैलेरी, बल्कि वर्क प्रोफाइल को लेकर भी लोग अपने अनुभव रख रहे हैं। हाल ही एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने हॉलीवुड में जेंडर पे गैप की बात रखी। इससे पहले भी कई बॉलीवुड एक्ट्रेसेस भी इस मुद्दे पर अपने एक्सपीरियंस बता चुकी हैं। इसी तरह यूके की फीमेल एमपी ग्रुप ने प्तपेमीटू कैम्पेन लॉन्च किया है, जो सैलेरी के साथ-साथ वर्क प्लेस पर बराबरी की बात करता है।


उदयपुर में भी अंतर
सीए निवेदिता सारदा कहती हैं कि उदयपुर में भी मेल एंड फीमेल एम्प्लॉइज में सैलेरी को लेकर अंतर देखने को मिल रहा है। उनकी पे स्केल मेल एम्प्लॉइज से कम रहती है, मेरा मानना है कि काम के घंटों से ज्यादा प्रोडक्टिविटी के हिसाब से सैलेरी होनी चाहिए। दूसरा, सैलेरी में अंतर का एक बहुत बड़ा कारण सैलेरी नेगोशिएशन के दौरान फीमेल कम सैलेरी पर भी आसानी से मान जाती हैं


लोग मेल सर्जन पर करते हैं ज्यादा विश्वास
डॉक्टर अनुपमा सोनी बताती हैं कि मेडिकल फील्ड में पे स्केल्स में अंतर देखने को नहीं मिलता। लेकिन सर्जिकल फील्ड में जैंडर गैप देखा जा सकता है। लोग मेल सर्जन पर ज्यादा विश्वास करते हैं, इसी के चलते लेडी डॉक्टर्स सर्जरी से अलग हटकर फील्ड चुनती हैं। स्थिति यह है कि चिकित्सा क्षेत्र में मात्र 10 प्रतिशत महिलाएं ही सर्जन हैं। दूसरा, कई जगहों पर हॉस्पिटल मैनेजमेंट भी मेल सर्जन को फीमेल सर्जन के मुकाबले ज्यादा सैलेरी देता है।

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क्या कहती है स्टडी
पि छले दिनों कई स्टडीज में सामने आया है कि फीमेल के मुकाबले मेल एम्प्लॉइज को न सिर्फ घंटों के हिसाब से ज्यादा सैलेरी मिलती है, बल्कि उन्हें प्रिफरेंस भी ज्यादा दी जाती है। वल्र्ड बैंक की ओर से हाल ही जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक हर 10 में से छह जॉब में मेल कैंडिडेट्स को प्रिफरेंस दी जाती है। दूसरी ओर, महिलाओं को लो स्टेटस और लो पेड जॉब्स पर रखा जाता है। ऐसे में एम्प्लॉइज के बीच में जैंडर गैप नजर आता है। वल्र्ड बैंक की यह रिपोर्ट आठ लाख जॉब विज्ञापनों की स्टडी से सामने आई थी। इसी तरह पिछले महीने जारी हुआ एक सैलेरी इंडेक्स दर्शाता है कि देश में महिलाओं की सैलेरी पुरुषों के मुकाबले 20 प्रतिशत तक कम है। रिपोर्ट के मुताबिक पुरुष हर घंटे 231 रुपए और महिला 184.8 रुपए ही कमाती हैं। सर्वे में 36 प्रतिशत लोगों ने भेदभाव की बात भी मानी।