औद्योगिक क्षेत्र की बस्तियों में ‘सांसों’ पर सितम, प्रदूषण का स्तर सामान्य से तीन गुणा अधिक
उदयपुर . झीलों की नगरी की ओबाहवा में अब जहर घुल रहा है। कहने को इस शहर के चारों तरफ गिर्वा की पहाडिय़ां एवं सर्वाधिक झीलों होने के नाते प्रकृति खूब मेहरबान है, लेकिन शहर में प्रदूषण का स्तर सामान्य से ज्यादा है और साल दर साल बढ़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों की आवासीय बस्तियों की स्थिति गंभीर है। औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर सामान्य से तीन गुणा अधिक है जो दिल्ली से भी ज्यादा है। यह इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की काया में ‘जहर’ घोल रहा है।
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 2018 के आंकड़ों के अनुसार शहर के तीन क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर अलग-अलग है। औद्योगिक क्षेत्र होने से मादड़ी का प्रदूषण स्तर बहुत ज्यादा है। शहर के मध्य टाउनहॉल क्षेत्र में सामान्य का डेढ़ गुणा व झील क्षेत्र अंबामाता में भी सामान्य से अधिक है।
शहर में चार माह ही शुद्ध हवा
बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार जून से सितम्बर यानी बरसात के मौसम में ही शहर की हवा शुद्ध रहती है। हालांकि इस मौसम में भी औद्योगिक क्षेत्र मादड़ी, कलड़वास में रहने वाले लोगों को जहरीली सांस ही लेनी पड़़ती है। इन चार माह में औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर औसत 142 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर तक रहता है जो सामान्य से डेढ़ गुणा ज्यादा है। अंबामाता व टाउनहॉल क्षेत्र में बरसात के मौसम में प्रदूषण का स्तर औसत 75 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर तक रहता है।
ऐसे समझें प्रदूषण का स्तर
अच्छा 0 से 50
संतोषजनक 51 से 100
मध्यम 101 से 200
खराब 201 से 300
बहुत खराब 301 से 400
गंभीर 401 से ज्यादा
(इकाई: माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर)
यह है स्थिति
माह मादड़ी अंबामाता टाउनहॉल दिल्ली
जनवरी -291- 80- 123 -328
फरवरी- 288 -115 -126 -243
मार्च -254 -110 -165 -203
अप्रेल -299 -101- 124 -222
मई -300- 80- 142- 217
(आंकड़े - माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर )