उदयपुर

राजस्थान के सलूंबर-प्रतापगढ़ में चांदीपुरा वायरस से हुई थी 15 बच्चों की मौत! NIV पुणे की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

राजस्थान के सलूंबर-प्रतापगढ़ में 15 बच्चों की मौत के पीछे चांदीपुरा वायरस होने की आशंका गहराई है। NIV पुणे की रिपोर्ट में जानवरों में वायरस की एंटीबॉडी मिली हैं। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और डॉक्टरों की कमी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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May 10, 2026
Chandipura Virus in Salumber-Pratapgarh
सलूंबर-प्रतापगढ़ में चांदीपुरा वायरस से हुई थी 15 बच्चों की मौत! (फोटो-एआई)

उदयपुर: सलूंबर जिले के लसाड़िया और प्रतापगढ़ की पारसोला तहसील में गत अप्रैल महीने में एक के बाद एक 15 बच्चों की मौत चांदीपुरा वायरस से होने की आशंका है। 13 अप्रैल को राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) पुणे की जांच में इन गांवों में जानवरों में चांदीपुरा वायरस की एंटीबॉडी मिली।

राजस्थान पत्रिका को मिली रिपोर्ट के अनुसार, सलूंबर जिले के लसड़िया ब्लॉक के घाटा और लालपुर गांव के जानवरों के दो सीरम नमूनों की जांच में इसकी पुष्टि हुई। तब तक दोनों गांवों में 5 बच्चों की मौत हो चुकी थी।

प्रतापगढ़ की पारसोला तहसील में 4 से ज्यादा सैंपल की रिपोर्ट में इस वायरस की पुष्टि हुई है। अब विभाग ने खजूरी गांव से मच्छरों और कीड़ों के सैंपल जांच के लिए पुणे भेजे हैं। यह वायरस रेबीज से भी कई गुना खतरनाक हैं।

इसके संक्रमित होने के बाद 24 से 48 घंटे में दर्दनाक मौत हो जाती है। इसके बाद 24 अप्रैल को लसाड़िया में 2 और बच्चियों की मौत हुई, जिसमें एक बच्ची की विसरा रिपोर्ट एफएसएल के पास गई।

इस पर सलूंबर जिले के सीएमएचओ डॉ. महेंद्र परमार का कहना है कि रिपोर्ट अभी तक नहीं आई। अब सवाल है कि जब क्षेत्र में इतने खतरनाक वायरस की पुष्टि हो गई थी तो प्रशासन ने वहां स्वास्थ्य सुविधाओं की क्या तैयारी की। सलूंबर जिले में 41 वेटरनरी डॉक्टर की जगह सिर्फ 9 डॉक्टर कार्यरत हैं। लसाड़िया तहसील में ही 10 चिकित्सा अधिकारी की जगह सिर्फ दो डॉक्टर हैं। वहीं, लेडी हेल्थ विजिटर के पूरे पद खाली हैं।

क्या है चांदीपुरा वायरस?

यह विशेष रूप से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अधिक खतरनाक माना जाता है, जितने बच्चों की मौत हुई सभी में ऐसे लक्षण थे। 24 से 48 घंटे में बुखार और उल्टी के बाद बच्चों की मौत हो गई। यह वायरस सैंडफ्लाई और मच्छरों जैसे कीटों से फैलता है। यह आमतौर पर गाय, भैंस और बकरियों में मिलता है। मच्छर जब इन जानवरों को काटते हैं तो इन कीटों से मनुष्यों तक पहुंच सकता है।

कैसे फैलता है यह वायरस?

चांदीपुरा वायरस इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता, सैंडफ्लाई और मच्छरों जैसे कीटों से फैलता है। यह आमतौर पर गाय, भैंस और बकरियों में मिलता है। मच्छर जानवरों को काटते हैं तो इन कीटों से मनुष्यों तक पहुंच सकता है। पशु बाड़े और कच्चे निर्माण अधिक होते हैं। ये संक्रमित कीट किसी व्यक्ति विशेषकर बच्चों को काटते हैं तो वायरस सीधे मस्तिष्क पर हमला करता है।

चेतावनी के बाद भी क्यों सोता रहा विभाग?

रिपोर्ट मिलने के बाद लसाड़िया ब्लॉक के घाटा और लालपुर गांवों में सैंडफ्लाई और चांदीपुरा वायरस को खत्म करने के लिए फॉगिंग और युद्धस्तर पर जागरूकता अभियान चलना चाहिए था। पर विभाग विभाग अंधेरे में तीर चलाता रहा और बच्चे मरते रहे। जब लक्षण (बुखार, उल्टी, बेहोशी) साफ थे और वायरस की पुष्टि रिपोर्ट के बाद भी विभाग पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार क्यों करता रहा। वैज्ञानिक आधार पर एक्शन प्लान तैयार होता तो मौतों को रोका जा सकता था।

जानवरों में मिला चांदीपुरा वायरस

एनआईवी पुणे की रिपोर्ट के अनुसार, गांव लसाड़िया से मिले 15 पशुओं के सीरम नमूनों का चांदीपुरा वायरस के लिए सीरम सर्वेक्षण किया। जांच में गाय, भैंस और बकरी के 15 नमूनों में से 2 नमूने पॉजिटिव मिले हैं। इनमें रहवासी सोका गमाना की 9 बकरियों और लक्ष्मण मीणा की चार गाय शामिल हैं।

रिपोर्ट में वायरस की पुष्टि, स्क्रीनिंग कर रहे

हमने जानवरों के सैंपल जांच के लिए पुणे लैब में भेजे थे। वहां की दो रिपोर्ट में चांदीपुरा वायरस की एंटीबॉडीज मिली है। इसके बाद हमने जानवरों की लगातार स्क्रीनिंग की और घर-घर जाकर अवेयरनेस कैंपेन चलाए हैं।
-डॉ. रविंद्र कुमार गोयल, उपनिदेशक पशु चिकित्सा, सलूंबर

विसरा रिपोर्ट के बाद ही मौत की वजह पता चलेगी

बच्चों की मौत की वजह क्या है? इसका पता आरएनटी मेडिकल कॉलेज से बच्ची की विसरा रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा। चांदीपुरा वायरस की एंटीबॉडीज मिलने के बाद हर गांव में फॉगिंग की गई। गांवों की लोकल बॉडीज के साथ जागरूकता के लिए बैठकें की। जिले में डॉक्टर्स कम हैं, इसके लिए सरकार को लिखा है। दूसरे अस्पताल से बाल रोग विशेषज्ञ को लसाड़िया में तैनात किया था।
-मोहम्मद जुनैद, कलक्टर, सलूंबर

Published on:
10 May 2026 07:41 am