
Rajasthan Schools : राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में वर्षों से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी अब शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। शिक्षा विभाग के शालादर्पण पोर्टल के अनुसार विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 29631 स्वीकृत पदों में से केवल 5365 पर ही कर्मचारी कार्यरत है, जबकि 24266 पद रिक्त है। यानी करीब 82 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। इसका सीधा असर विद्यालयों की साफ-सफाई, रखरखाव, पेयजल व्यवस्था, कार्यालय संचालन और विद्यार्थियों की मूलभूत सुविधाओं पर पड़ रहा है।
हाल ही राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 का अंतिम परिणाम जारी कर 45413 अभ्यर्थियों का चयन किया। लेकिन शिक्षक संगठनों का कहना है कि स्कूलों में वास्तविक जरूरत इससे कहीं अधिक है। बड़ी संख्या में विद्यालय आज भी बिना चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के संचालित हो रहे हैं।
उदयपुर जिले में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार 16 ब्लॉक में 2920 सरकारी विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 1641 प्राथमिक, 540 उच्च प्राथमिक, 739 वरिष्ठ माध्यमिक तथा 108 महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे विद्यालयों की है जहां स्थायी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अभाव में विद्यालय खुलने बंद होने, कक्षाओं की सफाई, पेयजल व्यवस्था, अभिलेख लाने-ले जाने, परिसर की देखरेख सहित कई कार्य शिक्षकों को स्वयं करने पड़ते हैं, जिससे उनका शैक्षणिक समय प्रभावित होता है।
जिन विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं हैं, वहां साफ-सफाई और दैनिक व्यवस्थाएं मिड-डे मील के कुक-कम-हेल्पर के भरोसे चल रही है। इन कर्मचारियों को हर महीने मात्र 2467 रुपए मानदेय मिलता है जबकि अक्षय पात्र संस्था से भोजन प्राप्त करने वाले विद्यालयों में यह राशि आधी रह जाती है। इतना ही नहीं, मानदेय का भुगतान भी कई बार समय पर नहीं होता।
राज्य सरकार से मांग की है कि प्रदेश के प्रत्येक प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक-उच्च माध्यमिक विद्यालय में कम से कम एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति अनिवार्य की जाए। जिन विद्यालयों में छात्र संख्या और कक्षाओं की संख्या अधिक है, वहां आवश्यकता के अनुसार दो या तीन पद स्वीकृत किए जाएं, ताकि विद्यालयों का संचालन सुचारु रूप से हो सके और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति मिले।
प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय में कम से कम एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होना चाहिए। जिन विद्यालयों में नामांकन और कक्षाओं की संख्या अधिक है, वहां आवश्यकता के अनुसार दो या तीन पद स्वीकृत किए जाएं। वर्तमान में अधिकांश विद्यालयों में सफाई और अन्य व्यवस्थाएं कुक-कम-हेल्पर के भरोसे चल रही हैं, जिनका मानदेय भी बेहद कम और भुगतान अनियमित है।
शेर सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ