उदयपुर में बीजेपी नेत्री ने अधिवक्ता विशाल गुर्जर पर एआई से आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल और दुष्कर्म का आरोप लगाया। भूपालपुरा थाने में केस दर्ज होते ही गिरफ्तारी हुई। एफएसएल जांच जारी है और मामला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
उदयपुर: बीजेपी नेत्री की ओर से वकील पर बलात्कार, ब्लैकमेलिंग और आईटी एक्ट में दर्ज मामले ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल मचा रखी है। वीडियो ने बीजेपी में भूचाल ला दिया है। उदयपुर से लेकर जयपुर तक चर्चा गर्म है। वहीं, कइयों पर गाज गिर सकती है।
पहले बीजेपी नेत्री ने भूपालपुरा थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में लिखा कि वकील विशाल गुर्जर ने एआई से आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। वहीं, एक अन्य पुराने प्रकरण में भी प्रोडक्शन वारंट से गिरफ्तारी की है।
भूपालपुरा थाने में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी नेत्री ने बताया कि वह पिछले एक वर्ष से अधिवक्ता विशाल गुर्जर के संपर्क में थीं। पांच महीने पहले आरोपी ने उसे कार्यालय बुलाकर कोल्डड्रिंक पिलाया, जिसके बाद उन्हें चक्कर आने लगे। कुछ समय बाद होश आया।
आरोप है कि आरोपी वकील ने अश्लील वीडियो बना लिए और वायरल करने की धमकी देकर शारीरिक संबंध बनाने तथा एक अन्य केस में समझौता कराने का दबाव बनाया। यह भी आरोप है कि आरोपी ने एआई के जरिए अन्य परिचितों के साथ वीडियो तैयार कर दिए। उसे आधार बनाकर ब्लैकमेल किया। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल कराया है और डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है।
मुकदमा दर्ज होने के कुछ ही घंटों में पुलिस ने रात तीन बजे आरोपी को उसके घर से हिरासत में लिया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने दरवाजा तोड़कर जबरन प्रवेश किया, सीसीटीवी डीवीआर और मोबाइल जब्त किए तथा परिजनों से मारपीट की। आरोपी की पत्नी ने एसपी से मिलकर जांच अधिकारी बदलने की मांग की।
हालांकि जांच अधिकारी नहीं बदला गया, लेकिन एएसपी सिटी को मामले की निगरानी सौंपी गई। परिजनों ने उदयपुर प्रवास के दौरान पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की और पूरे प्रकरण को षड्यंत्र बताया।
भूपालपुरा थाना पुलिस ने आरोपी को एक अन्य केस में प्रोडक्शन वारंट से गिरफ्तार किया। आरोप है कि उसने एक पारिवारिक कोर्ट केस निपटाने के नाम पर बेंगलुरु निवासी व्यक्ति से 8.75 लाख रुपए हड़प लिए। समझौते के नाम पर रकम अपने खाते में जमा करवा ली और बाद में फोन उठाना बंद कर दिया।
कथित वीडियो को लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों में चर्चाएं तेज है। वीडियो में किन-किन लोगों के नाम हो सकते हैं, इसको लेकर अटकलों का दौर जारी है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि एफएसएल जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि वीडियो वास्तविक हैं या एआई से तैयार किए गए। सूत्रों के अनुसार, एफआईआर की जानकारी उच्च स्तर तक पहुंच चुकी है और जयपुर तक इसकी चर्चा है।
अब पूरे प्रकरण की दिशा एफएसएल जांच पर निर्भर है। यदि वीडियो असली पाए जाते हैं तो मामला और गंभीर हो सकता है, वहीं एआई से छेड़छाड़ साबित होने पर आइटी एक्ट की धाराएं मजबूत होंगी। राजनीतिक रूप से भी यह मामला आने वाले दिनों में शहर की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
यदि किसी अन्य जनप्रतिनिधि या नेता का नाम सामने आता है तो राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। फिलहाल, पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, बैंक ट्रांजेक्शन और सीसीटीवी फुटेज की जांच में जुटी है।