उदयपुर

Jal Jeevan Mission: राजस्थान के 44 लाख घरों में लोग कर रहे को नल का इंतजार, 90% पेयजल परियोजनाओं पर काम ठप

राजस्थान में जल जीवन मिशन की रफ्तार धीमी है। करीब 3200 करोड़ रुपए का भुगतान लंबित होने से पेयजल परियोजनाएं प्रभावित हैं और लगभग 44 लाख ग्रामीण परिवार अब भी नल कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं।
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Oct 14, 2026
Rajasthan Jal Jeevan Mission
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उदयपुर. हर ग्रामीण परिवार तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से 2019 में शुरू किया गया जल जीवन मिशन (जेजेएम) राजस्थान में सुस्त रफ्तार से जूझ रहा है। प्रदेश के 1 करोड़ 7 लाख 87 हजार 724 ग्रामीण परिवारों में से अब तक 63 लाख 90 हजार 739 घरों (59.24%) तक ही नल कनेक्शन पहुंच सके है। करीब 44 लाख परिवार अब भी नल कनेक्शन का इंतजार कर रहे है। मिशन की समय सीमा 2028 तक बढ़ाए जाने के बावजूद काम अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका है। दूसरी ओर, संवेदकों के करीब 3200 करोड़ रुपए का भुगतान दो साल से लंबित होने के कारण प्रदेश में 90% पेयजल परियोजनाओं का काम ठप बताया जा रहा है।

अधिकारियों ने बैठकों में लक्ष्य पूरा करने के लिए रोजाना 10 हजार कनेक्शन जारी करने की बात कही, लेकिन जमीनी स्थिति इससे उलट है। मंगलवार को 41 जिलों में एक भी जल कनेक्शन जारी नहीं हुआ। भुगतान लंबित रहने से संवेदक दो बार हड़ताल भी कर चुके हैं, लेकिन बकाया भुगतान का संकट बना हुआ है। ऐसे में कनेक्शन जारी करने की रफ्तार बढ़ाने की चुनौती बरकरार है।

आदिवासी अंचल में दोहरी चुनौती

उदयपुर के पहाड़ी और वनाच्छादित क्षेत्रों में स्थिति बेहद चिंताजनक है। जिले में 4.40 लाख परिवारों में से केवल 1.64 लाख घरों में ही नल हैं। दुर्गम पहाड़ियों तक पाइपलाइन बिछाना कठिन साबित हो रहा है।

अन्य राज्यों से भी पिछड़ा राजस्थान

देशभर में जेजेएम का राष्ट्रीय औसत 82.52% पहुंच चुका है। गुजरात, हरियाणा, पंजाब, बिहार 95.7% और उत्तरप्रदेश 92.3% हैं। दूसरी ओर राजस्थान 59.24% कवरेज के साथ सबसे पिछड़े राज्यों की कतार में है।

प्रदेश के टॉप-10 जिले, जहां बेहतर कार्य

टॉप जिलों में बात करें तो हनुमानगढ़ 90.97%, भीलवाड़ा 89.75%, श्रीगंगानगर 88.77%, पाली 88.36%, डीडवाना-कुचामन 85.04%, झालावाड़ 77.18% और करौली 68.74% पर है।

पानी की उपलब्धता भी बनी चुनौती

पिछले दो वर्षों में बजट संकट के कारण परियोजनाओं का काम प्रभावित हुआ। हाल के महीनों में बजट जारी होना शुरू हुआ है, लेकिन इससे ठप परियोजनाओं को कितनी गति मिली, यह बड़ा सवाल है। कमजोर मानसूनी बारिश और कई जिलों में भूजल स्तर गिरने से चुनौती और बढ़ गई है। ऐसे में सवाल सिर्फ घरों तक पाइपलाइन और नल पहुंचाने का नहीं, बल्कि नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने का भी है। यदि स्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं होगा, तो कनेक्शन होने के बावजूद ग्रामीण परिवारों की प्यास बुझाना मुश्किल होगा।

Updated on:
14 Oct 2026 01:57 pm
Published on:
14 Oct 2026 01:56 pm