शादियों का नया ट्रेंड चर्चा में है। अब मेहमानों को बुके-मिठाई नहीं, बल्कि 150 रुपए से शुरू होने वाले इको-फ्रेंडली पौधे गिफ्ट किए जा रहे हैं। स्नेक प्लांट, जेड जेड जैसे लो-मेंटेनेंस प्लांट्स की मांग बढ़ी।
उदयपुर: बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ती पर्यावरण जागरुकता के बीच जहां कभी शादी में बुके और मिठाई के डिब्बे आम बात थे। वहीं, मेहमानों के हाथों में हरी-भरी यादें थमाई जा रही हैं। पहले शादी में मेहमानों को मिठाई के डिब्बे, शोपीस या बुके दिए जाते थे। अब दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार ऐसे तोहफे देना पसंद कर रहे हैं, जो लंबे समय तक याद दिलाते रहें।
वेडिंग प्लानर ने बताया, युवा कपल्स खासतौर पर ‘इको-फ्रेंडली वेडिंग’ थीम अपना रहे हैं। उनका मानना है कि पौधा सिर्फ गिफ्ट नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने का संदेश देगा। वेडिंग प्लानर्स और नर्सरी संचालकों के अनुसार, सीजन में 30 से 40 प्रतिशत तक प्लांट गिफ्टिंग के ऑर्डर बढ़े हैं।
नर्सरी संचालकों के अनुसार शादी में ऐसे पौधों की मांग ज्यादा है, जो कम पानी में भी हरे-भरे रहें। स्नेक प्लांट और जेड जेड को ‘लो मेंटेनेंस’ कैटेगरी में सबसे बेहतर माना जा रहा है, इनमें शामिल हैं…
अब सिर्फ पौधा देना ही नहीं, बल्कि उसे आकर्षक तरीके से पेश करना भी ट्रेंड में है। जूट बैग, रीसाइकिल पेपर रैपिंग। दूल्हा-दुल्हन के नाम का टैग, 'थैंक यू' और 'ग्रोइंग विथ अस' जैसे संदेश वाले कार्ड। साथ में छोटी सी केयर गाइड। गर्मी में छोटे सजावटी पौधे 50 से 150 रुपए से शुरू हो जाते हैं। आकर्षक पॉट और कस्टमाइज पैकिंग के साथ कीमत 250-500 रुपए तक पहुंचती है।
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अनीता राठौड़ का कहना है, शादी जैसे आयोजन में यदि पौधे वितरित किए जाएं तो यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अच्छा कदम है। लोगों में लगाव बढ़ेगा और हर घर में हरियाली बढ़ेगी। ऐसे पौधों का चयन करना चाहिए जो स्थानीय मौसम के अनुकूल हों और ज्यादा पानी की आवश्यकता न हो।
मनन और राधिका, कपल: "हम चाहते थे कि हमारी शादी की याद सिर्फ फोटो तक सीमित न रहे। इसलिए हमने मेहमानों को पौधे देने का फैसला किया। वे उसे बढ़ता देखेंगे तो हमारी शादी याद आएगी। यह हमारे लिए आशीर्वाद जैसा है।"
आयुष जैन: "आज हर कोई पर्यावरण की बात करता है, लेकिन छोटी शुरुआत जरूरी है। शादी में पौधा देना हमें अलग पहचान देता है। यह दिखावा नहीं संदेश है।"
पुष्पेंद्र कुशवाहा, नर्सरी संचालक: "पहले शादियों से उन्हें ज्यादा काम नहीं मिलता था, लेकिन अब वेडिंग सीजन में अलग से स्टॉक तैयार किया जाता है। लोग ऐसे पौधे चुन रहे हैं जो टिकाऊ हों।