उदयपुर

जिगर के टुकड़ों पर ‘झूलती मौत से चिंतित अभिभावकों की किसी ने नहीं सुनी

school bhavan ki kami मावली के पुरावतों का खेड़ा विद्यालय का मामला, एक कमरे में पढऩे को मजबूर सभी कक्षाएं, हादसे को न्योता देता जर्जर विद्यालय भवन
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जिगर के टुकड़ों पर 'झूलती मौत से चिंतित अभिभावकों की किसी ने नहीं सुनी
जिगर के टुकड़ों पर 'झूलती मौत से चिंतित अभिभावकों की किसी ने नहीं सुनी

उदयपुर/ मावली. school bhavan ki kami यूं तो सरकार की ओर से शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण सुधार को लेकर ढेरों योजनाएं चलाई जा रही हैं। कहने को बालकों के सर्वांगीण विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। लेकिन, धरातल पर सुविधाओं के नाम पर सरकार आम विद्यार्थी को क्या सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। इसकी बानगी यहां मावली तहसील क्षेत्र के पुरावतों का खेड़ा स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में देखने को मिलती है। यहां शिक्षा के प्रति स्थानीय ग्रामीण जागरूक हैं। वह बच्चों को जिम्मेदारी से स्कूल भेजते हैं। इसलिए ही सरकारी प्रयासों के बीच इस बार नामांकन की संख्या 74 पर पहुंची है। पर, दुर्भाग्य ही कहेंगे कि ग्रामीणों की इच्छा के विपरीत कक्षा एक से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को यहां एक कक्ष में ही बिठाकर अध्ययन कराया जा रहा है। सामूहिक 'खिचड़ीÓ से विद्यार्थियों का शैक्षणिक कार्य प्रभावित ही नहीं है बल्कि उनका भविष्य भी उलझन में है। खास समस्या यह है कि विद्यालय में तीन कक्षाकक्ष हैं। इनमें से एक में प्रधानाध्यापक कक्ष संचालित हंै, जबकि हकीकत यह है कि विद्यालय की छत खस्ताहाल है। पानी टपकन की समस्या के अलावा छत के गिरने की आशंकाएं गहराई हैं। ऐसा ही हाल प्रधानाध्यापक कक्ष का भी है। बरसात में यहां का रिकॉर्ड भी गीला होने से नहीं बचाया जा सका है।
दो वर्ष से नियमित मांग
गांव के रूपलाल डांगी ने बताया कि विद्यालय भवन की क्षतिग्रस्त हालत को लेकर लगातार दो वर्ष से प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करा रहे हैं। इसके बाद भी प्रशासनिक स्तर पर समस्या को लेकर कोई सुध नहीं लगी गई। विद्यार्थियों के ऊपर मंडराते संकट को लेकर अभिभावकों व ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है। दो बार सीबीईओ कार्यालय, पीईईओ एवं ग्राम पंचायत के माध्यम से पंचायत समिति को भी इस बारे में अवगत कराया गया था। लेकिन, अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

तो बच्चों को नहीं भेजेंगे स्कूल
बच्चों के सिर पर झूलती 'मौतÓ से चिंतित अभिभावकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रशासनिक स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होता है तो वह उनके बच्चों को स्कूल पढऩे जाने से रोकेंगे। परिजनों को उनके बच्चों की सलामती की चिंता सता रही है।

प्रस्ताव में शामिल
विद्यालय विकास समिति की ओर से प्रस्ताव लिया जा चुका है। स्वयं मेरे स्तर पर दो बार मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय व ग्राम पंचायत की ग्राम सभा में क्षतिग्रस्त स्कूल की जानकारी दी गई है। school bhavan ki kami हालही में पीइइओ को भी सूचित किया है। वर्तमान में बच्चों को बरामदे में बिठाकर पढ़ाना मजबूरी है।
-सरोज सालवी, प्रधानाध्यापिका, पुरावतों का खेड़ा

Published on:
09 Oct 2019 06:00 am