उदयपुर

उदयपुर में 2 करोड़ की रिश्वत का मामला: SOG के ASP मुकेश सोनी गिरफ्तार, दलाल पहले ही ट्रैप

उदयपुर के 2 करोड़ रिश्वत मामले में SOG के ASP मुकेश कुमार सोनी गिरफ्तार हुए हैं। ACB ने पहले उनके दलाल सज्जन सिंह जैन को 2 करोड़ की रिश्वत लेते पकड़ा था। यह रकम 272 प्लॉट घोटाले में FR लगाने और जब्त सामान छोड़ने के बदले मांगी गई थी।
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Sep 27, 2026
udaipur 2 crore bribe case
ACB की गिरफ्त में सज्जन सिंह जैन और ASP मुकेश कुमार सोनी (पत्रिका फोटो)

उदयपुर: 272 प्लॉट घोटाले के मामले में 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में एसीबी ने एसओजी के एडिशनल एसपी मुकेश कुमार सोनी को गिरफ्तार कर लिया है। एसीबी उदयपुर की टीम ने रविवार दोपहर यह कार्रवाई की। इससे एक दिन पहले शनिवार को एएसपी के कथित दलाल सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को 2 करोड़ रुपए लेते हुए ट्रैप किया गया था।

एसीबी के मुताबिक, रिश्वत की यह रकम 272 प्लॉट घोटाले के केस में एफआर लगाने और जांच के दौरान जब्त सामान वापस दिलाने के नाम पर मांगी गई थी। दलाल की गिरफ्तारी के बाद शनिवार देर रात एएसपी मुकेश सोनी को बालोतरा स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया था। पूछताछ के बाद रविवार को उनकी गिरफ्तारी की गई।

शिकायत के बाद एसीबी ने शुरू किया सत्यापन

एसीबी डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के अनुसार, परिवादी ने शिकायत दी थी कि उसके खिलाफ उदयपुर के सूरजपोल थाने में 272 प्लॉट घोटाले से जुड़ा मामला दर्ज है। इस केस की जांच एसओजी के एएसपी मुकेश सोनी कर रहे थे। शिकायत में आरोप लगाया गया कि केस में एफआर लगाने के बदले 2 करोड़ रुपए की मांग की जा रही है। शिकायत का सत्यापन कराया गया। आरोप सही पाए जाने के बाद एसीबी ने दलाल के जरिए रिश्वत की रकम लेने की योजना बनाई। शनिवार को जैसे ही सज्जन सिंह ने रुपए से भरा बैग लिया, एसीबी की टीम ने उसे पकड़ लिया। ट्रैप की कार्रवाई में 4 लाख रुपए के असली नोट रखे गए थे, जबकि 1.96 करोड़ रुपए डमी नोट थे।

दफ्तर में नहीं, कार में हुई थी ASP से मुलाकात

पूरे मामले में परिवादी और एएसपी के बीच हुई मुलाकात भी सामने आई है। शिकायत के मुताबिक, सज्जन सिंह ने पहले परिवादी को भरोसा दिलाने के लिए उसकी मुलाकात मुकेश सोनी से करवाई थी। यह मुलाकात किसी सरकारी कार्यालय में नहीं, बल्कि उदयपुर में एक चौराहे के पास खड़ी कार में हुई थी। परिवादी के अनुसार, कार की आगे वाली सीट पर मुकेश सोनी बैठे थे, जबकि पीछे की सीट पर परिवादी और सज्जन सिंह मौजूद थे। शिकायतकर्ता ने बताया कि सज्जन सिंह उससे केस खत्म कराने के बदले 2 करोड़ रुपए की मांग कर रहा था। इतनी बड़ी रकम मांगे जाने पर उसने पहले एएसपी से मुलाकात कराने की बात कही थी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रकम वास्तव में किसके लिए मांगी जा रही है।

बातचीत के दौरान ASP ने नहीं की पैसों पर बात

परिवादी के मुताबिक, कार में सज्जन सिंह ने केस निपटाने के बदले 2 करोड़ रुपए देने की बात कही। इस दौरान मुकेश सोनी काफी देर तक चुप रहे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें बातचीत रिकॉर्ड किए जाने का डर था, इसलिए उन्होंने सीधे तौर पर रिश्वत या केस से संबंधित कोई बात नहीं कही। हालांकि, मुलाकात के अंत में मुकेश सोनी ने अपने मोबाइल की स्क्रीन पर केवल '2 करोड़' लिखकर परिवादी को दिखाया। शिकायत के अनुसार, उन्होंने इशारे में मामला खत्म होने का भरोसा दिलाया। इसके बाद सज्जन सिंह लगातार परिवादी के संपर्क में रहा। एसीबी ने शिकायत का सत्यापन पूरा करने के बाद शनिवार को ट्रैप की कार्रवाई की।

क्या है 272 प्लॉट घोटाला?

यह मामला उदयपुर में खाली और निरस्त प्लॉटों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर कब्जा करने और उन्हें बेचने के आरोपों से जुड़ा है। आरोप है कि भू-माफियाओं ने नगर निगम के कुछ अधिकारी-कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से खाली जमीनों के फर्जी दस्तावेज और लीज डीड तैयार कराए। इसके बाद फर्जी लोगों के नाम नामांतरण खोलकर इन प्लॉटों को आगे बेचने का आरोप है। मामले में करोड़ों रुपए के प्लॉटों से जुड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद जांच शुरू हुई थी।

पत्नी के जेवर और 11 लाख रुपए भी हुए थे जब्त

272 प्लॉट घोटाले को लेकर 2022 में सूरजपोल थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। इसी मामले में एसओजी ने 4 अगस्त को सुखेर निवासी पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया और उनके पति निरंजन मोगरा को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान उनके घर से करीब 2 किलो सोने के जेवर और 11 लाख रुपए बरामद किए गए थे। आरोप है कि इसी मामले में एफआर लगाने और जब्त सामान वापस दिलाने के लिए 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी गई। मामले में करीब 500 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप भी लगाया गया है और यह मुद्दा राजस्थान विधानसभा में भी उठ चुका है।

2022 में सामने आया था मामला

272 प्लॉट मामले को सबसे पहले 2022 में तत्कालीन कांग्रेस पार्षद अजय पोरवाल ने प्रमुखता से उठाया था। जांच के बाद नगर निगम ने 48 पट्टे निरस्त किए थे। इस मामले को तत्कालीन पंजाब राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया और उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन भी कई बार उठा चुके हैं। ताराचंद जैन ने विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया था। अप्रैल 2022 से एसओजी इस मामले की जांच कर रही है और अब तक करीब छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

मुकेश सोनी पर पहले भी लगे थे आरोप

मुकेश सोनी इससे पहले भी विवादों में रहे हैं। अजमेर में नशीली दवाओं की तस्करी से जुड़े एक मामले में आरोपी को कथित फायदा पहुंचाने के आरोपों के बाद 2022 में हाईकोर्ट ने मुकेश सोनी समेत तीन पुलिस अधिकारियों को रेंज से बाहर भेजने के आदेश दिए थे। साल 2024 में मुकेश सोनी एसओजी की अजमेर चौकी में तैनात रहे। उस दौरान भी विवादों के बीच उन्हें वहां से हटाया गया था। इसके बाद नवंबर 2025 में उन्हें एसओजी की उदयपुर यूनिट में तैनाती दी गई थी।

Updated on:
27 Sept 2026 02:52 pm
Published on:
27 Sept 2026 02:31 pm