Udaipur Airport: फ्रिक्शन लेवल यह तय करता है, लैंडिंग के बाद तेज रफ्तार विमान कितनी सुरक्षित दूरी में रुक पाएगा। खासकर बारिश, नमी या खराब मौसम में जब रनवे गीला या फिसलन भरा हो जाता है, तब पर्याप्त फ्रिक्शन का होना जरूरी हो जाता है।
Udaipur News: राजस्थान के उदयपुर में डबोक स्थित महाराणा प्रताप एयरपोर्ट पर विमानों की लगातार आवाजाही के चलते रनवे की सतह पर एक तकनीकी समस्या पैदा होती है, जो आमतौर पर यात्रियों की नजर में नहीं आती।
लैंडिंग के समय विमान के पहियों और रनवे के बीच जबरदस्त घर्षण होता है। इस घर्षण के कारण टायर से निकलने वाला रबर रनवे पर चिपकता चला जाता है। समय के साथ रनवे पर रबर की मोटी परत जम जाती है।
एयरपोर्ट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक हर माह चार किलो तक रबर इकट्ठा हो जाता है। इसे समय पर साफ नहीं किया जाए तो रनवे की सतह चिकनी होने लगती है, जिससे वाहनों का फ्रिक्शन धीरे-धीरे कम हो जाता है। इसका सीधा मतलब है कि विमान को रनवे पर रुकने और दिशा नियंत्रित करने में ज्यादा दूरी और समय लग सकता है।
एविएशन नियमों के मुताबिक, फ्लाइट की सुरक्षित लैंडिंग के लिए रनवे का घर्षण स्तर न्यूनतम 0.75 यानी 75 प्रतिशत होना जरूरी है। यह सुरक्षा मानक डीजीसीए और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने निर्धारित किया है।
फ्रिक्शन लेवल यह तय करता है, लैंडिंग के बाद तेज रफ्तार विमान कितनी सुरक्षित दूरी में रुक पाएगा। खासकर बारिश, नमी या खराब मौसम में जब रनवे गीला या फिसलन भरा हो जाता है, तब पर्याप्त फ्रिक्शन का होना जरूरी हो जाता है। इससे रनवे पर जमे टायरों के रबर निशान और अन्य गंदगी को हटाने के लिए नियमित रूप से विशेष सफाई की जाती है।
रनवे पर हाई-प्रेशर वाटर जेट तकनीक की मदद से आमतौर पर रात में सफाई का काम किया जाता है, ताकि दिन में उड़ानों के संचालन पर कोई असर न पड़े। हर सफाई के बाद विशेष उपकरणों से रनवे का फ्रिक्शन लेवल मापा जाता है।
जांच में यह स्तर तय सुरक्षा मानकों से कम पाया जाता है तो दोबारा सफाई की जाती है। एयरपोर्ट प्रशासन इस पूरी प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखता है।
हवाई अड्डों पर विमानों की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए रनवे की नियमित और विशेष सफाई की जाती है। लैंडिंग के दौरान विमानों के पहियों की तेज़ रगड़ से रनवे पर रबर की मोटी परत जम जाती है, जिससे पकड़ कम होने का खतरा बढ़ जाता है।
रबर को हटाने के लिए हाई जेट प्रेशर मशीन का उपयोग किया जाता है, जिसमें अत्यधिक दबाव वाले पानी की धार से रनवे की सतह को साफ किया जाता है। यह प्रक्रिया करीब दो माह के तय अंतराल पर होती है। सफाई के दौरान रबर निकालते हैं, ताकि रनवे पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप बना रहे।