
उदयपुर. दिल की बीमारी हमेशा सीने में दर्द के साथ सामने आए, यह जरूरी नहीं। शुगर, ब्लड प्रेशर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल ऐसी तीन आम बीमारियां हैं, जो कई बार बिना किसी खास लक्षण के शरीर में बनी रहती हैं और धीरे-धीरे दिल की नसों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। आरएनटी मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी सेंटर के वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार करीब 95 हजार मरीज ओपीडी में पहुंचे और 5 हजार मरीज भर्ती हुए। इस दौरान 2600 एंजियोग्राफी और करीब 1350 एंजियोप्लास्टी की गईं। विश्व हृदय दिवस पर विशेषज्ञों का कहना है कि शुगर, बीपी और कोलेस्ट्रॉल को अलग-अलग समस्या मानने के बजाय इनके कारण बढ़ने वाले दिल के खतरे को समय रहते पहचानना जरूरी है। इस वर्ष विश्व हृदय दिवस की थीम है हर धड़कन का रखें खयाल।
शुगर बढ़ी, नसों के लिए खतरा
डायबिटीज लंबे समय तक नियंत्रित नहीं रहने पर शरीर की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकती है। इसके साथ नसों पर भी असर पड़ सकता है। कुछ डायबिटीज मरीजों में हृदय से जुड़े दर्द के संकेत सामान्य तरीके से महसूस नहीं होते। इसलिए हार्ट की समस्या होने पर भी सीने में तेज दर्द के बजाय थकान, सांस फूलना, कमजोरी, पसीना या अचानक काम करने की क्षमता कम होने जैसे संकेत दिख सकते हैं।
बीपी का दबाव दिल की नसों पर
हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर मरीज सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लंबे समय तक बढ़ा हुआ बीपी हृदय को सामान्य से अधिक मेहनत करने के लिए मजबूर करता है और रक्त वाहिकाओं पर दबाव डाल सकता है। हाई बीपी भी कई मरीजों में बिना किसी लक्षण के बना रहता है। इसलिए केवल सिरदर्द या चक्कर आने का इंतजार करना सही तरीका नहीं है।
कोलेस्ट्रॉल बढ़ा तो जम सकता प्लाक
खून में एलडीएल यानी ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने पर रक्त वाहिकाओं की दीवारों में प्लाक जमा होने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। समय के साथ इससे रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की भी आमतौर पर कोई खास बाहरी निशानी नहीं होती। यही वजह है कि कई लोगों को पहली बार समस्या सामने आने पर ही पता चलता है कि उनका कार्डियक रिस्क लंबे समय से बढ़ा हुआ था।
तीनों रोग साथ हों तो ज्यादा रिस्की
शहर के अस्पतालों में आने वाले मरीजों में डायबिटीज, बीपी और कोलेस्ट्रॉल एक साथ पाए जाने पर डॉक्टर जोखिम के सभी पहलुओं को देखते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल शुगर सामान्य कर लेना या सिर्फ बीपी की गोली लेना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। मरीज की पूरी स्थिति के आधार पर ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल, वजन, किडनी की स्थिति और अन्य जोखिम कारकों की निगरानी जरूरी है।
दिल की बीमारी का इंतजार सीने में दर्द आने तक नहीं करना चाहिए। डायबिटीज, हाई बीपी या बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल वाले मरीजों को नियमित चिकित्सकीय फॉलोअप रखना चाहिए। कौन-सी कार्डियक जांच जरूरी है, यह उम्र, बीमारी की अवधि और अन्य जोखिमों के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं।
- डॉ. दीपक आमेटा, हृदय रोग विशेषज्ञ, आरएनटी मेडिकल कॉलेज