
उदयपुर। बारिश के मौसम में जिस नींबू के भाव सामान्य तौर पर गिर जाते हैं और कम उठाव के कारण मंडियों में सड़ने तक की नौबत आ जाती है, वही नींबू इस बार लोगों की जेब निचोड़ रहा है। 15 दिन पहले 100 रुपए किलो बिक रहा नींबू अब 200 रुपए किलो के पार पहुंच गया है। कई जगह इसके भाव सेब से भी अधिक हो गए हैं। अचानक बढ़े भाव का असर यह है कि लोग नींबू खरीदने से पहले भाव पूछ रहे हैं और भाव सुनकर ही कई ग्राहक पीछे हट रहे हैं।
व्यापारियों के अनुसार इस बार बारिश के दौरान नींबू की आवक बढ़ने के बजाय घट गई है। इसकी मुख्य वजह पानी की कमी के कारण फसल खराब होना बताई जा रही है। उदयपुर की मंडियों में नींबू की आवक गुजरात के भावनगर और मध्य प्रदेश के रतलाम व जाबड़ा से होती है, लेकिन इस समय वहां से आवक बेहद कम है। आवक कम होने से थोक भाव लगातार बढ़ रहे हैं और इसका सीधा असर खुदरा बाजार पर दिखाई दे रहा है।
व्यापारी मुकेश खिलवानी ने बताया कि करीब 15 दिन पहले नींबू के भाव होलसेल में 100 रुपए किलो थे। इसके बाद आवक घटने के साथ भाव लगातार बढ़ते गए। दो दिन पहले 130 से 150 रुपए किलो के बीच बिक रहा था, लेकिन रविवार को यही भाव बढ़कर 180 से 200 रुपए किलो तक पहुंच गया। अभी थोक में यह 200 रुपए प्रति किलो के भाव में बिक रहा है। स्थानीय मंडियों में एक नींबू 10 से 15 रुपए तक में बिक रहा है। अचानक इतनी तेजी आने से खुदरा व्यापारी भी ज्यादा मात्रा में नींबू नहीं उठा रहे हैं। कई व्यापारी एक-दो किलो नींबू ही खरीदकर बिक्री कर रहे हैं, ताकि महंगा माल बचने पर नुकसान न उठाना पड़े।
व्यापारियों का कहना है कि सामान्य तौर पर गर्मी के बाद बारिश के मौसम में नींबू की आवक अच्छी रहती है। इस दौरान बाजार में नींबू की उपलब्धता बढ़ने से भाव घटकर 20 से 30 रुपए किलो तक आ जाते हैं। बारिश में नींबू की मांग भी अपेक्षाकृत कम रहती है। ऐसे में उठाव कम होने पर बड़ी मात्रा में नींबू मंडियों में पड़ा रह जाता है और सड़ने के बाद उसे फेंकना पड़ता है।
लेकिन इस बार स्थिति उलट है। समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिलने से नींबू की फसल प्रभावित हुई और उत्पादन कम रहा। इसके कारण बारिश के मौसम में मंडियों में आने वाली अतिरिक्त आवक ही नहीं हो पाई। नतीजा यह हुआ कि जिस मौसम में नींबू सस्ता होना चाहिए था, उसी समय इसकी कीमत लगातार बढ़ती चली गई।