
Vishwaraj Singh Mewar: उदयपुर: मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य और नाथद्वारा से विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़, ब्रिगेडियर भूपेंद्र सिंह हाडा और इतिहासकार राजवीर सिंह चलकोई की तस्वीरों (पोस्टर्स) के कथित अपमान का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने इन सम्मानित व्यक्तित्वों की तस्वीरों को पैरों से रौंदा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उदयपुर समेत पूरे राजस्थान के राजपूत समाज और सर्व समाज में भारी गुस्सा फैल गया है।
इस पूरे विवाद की जड़ राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के पाठ्यक्रम में शामिल 'मराठा साम्राज्य के नक्शे' से जुड़ी है। दरअसल, एनसीईआरटी की किताबों में मराठा साम्राज्य का एक नक्शा प्रकाशित किया गया है।
इतिहासकारों और राजपूत समाज का आरोप है कि इस नक्शे में ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है। नक्शे में मेवाड़ और राजस्थान के कई अन्य हिस्सों को भी मराठा साम्राज्य के अधीन दिखाया गया है।
मेवाड़ और राजस्थान के लोगों का कहना है कि इतिहास में मेवाड़ कभी भी मराठों के अधीन नहीं रहा। महाराणा प्रताप और मेवाड़ के अन्य शासकों ने हमेशा अपनी स्वतंत्रता को बनाए रखा। इसलिए गलत नक्शा छापे जाने का विरोध किया जा रहा था। इसी विरोध और बहस के बीच मुंबई के एक कार्यक्रम में कुछ लोगों ने गुस्से में आकर विश्वराज सिंह मेवाड़ और अन्य दिग्गजों की तस्वीरों का अपमान कर दिया।
इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्री राजपूत करणी सेना के उदयपुर संभाग अध्यक्ष, डॉक्टर परमवीर सिंह दुलावत ने इसे बेहद घृणित कृत्य बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं है, बल्कि यह पूरे मेवाड़, देश और 'हिंदूआ सूरज' महाराणा प्रताप के उन महान सिद्धांतों का अपमान है, जिन्होंने देश की आजादी और स्वाभिमान के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था।
दुलावत ने आक्रोश जताते हुए कहा, चेहरा छुपाकर केवल एक कागज के टुकड़े पर पांव रखने से तुम मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास को दबा या मिटा नहीं सकते। जब पूरा भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, तब केवल मेवाड़ ही ऐसा राज्य था जिसने मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की। मेवाड़ का इतिहास किसी साधारण कलम से नहीं, बल्कि योद्धाओं के खून और तलवारों से लिखा गया है।
राजपूत समाज ने महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार से इस मामले में तुरंत दखल देने की मांग की है। करणी सेना के नेताओं का कहना है कि जो लोग देश को जाति और क्षेत्र के नाम पर बांटना चाहते हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
समाज ने चेतावनी दी है कि इस विवाद की आग को अगर तुरंत नहीं बुझाया गया और दोषियों को ढूंढकर जेल की सलाखों के पीछे नहीं डाला गया, तो मेवाड़ से विरोध की ऐसी आंधी उठेगी, जिसे सरकार संभाल नहीं पाएगी। उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों का सर्व समाज बहुत जल्द सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।