Patrika Mahila Suraksha Abhiyaan: सरकारी और गैर सरकारी विभागों में महिला अपराध रोकने के लिए बनाई गई कमेटियों की भी मॉनिटरिंग होनी चाहिए।
उदयपुर। प्रौद्योगिकी युग में अपराधी फ्रॉड करने के लिए नित नई तकनीकों को इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन पुलिस और सरकारी एजेंसियों के पास पुरानी तकनीकें ही है। इनमें सुधार के साथ ही कानूनों में सजा के प्रावधान में भी संशोधन की आवश्यकता है। साइबर ठगों का आसान शिकार महिलाएं ही होती है, ऐसे ठगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए। यह बात पत्रिका रक्षा कवच : अपराधों के विरुद्ध महिला सुरक्षा अभियान के तहत शहर की महिलाओं ने कही।
रूपम नलवाया ने कहा कि प्रत्येक कॉलोनी और मोहल्ले में ऐसी टीम होनी चाहिए जो महिला अपराधों पर निगाह रखे। किसी प्रकार का अपराध होने पर टीम समझाइश करे। इससे बात नहीं बने तो पुलिस की मदद लेकर समाधान निकाला जाए।
राजेश्वरी नैणावा ने कहा कि कई बार सामने आता है कि स्कूली बच्चे भी सोशल मीडिया पर गलत पोस्ट डालते हैं। ऐसे में इन बच्चों को समय-समय शिविर लगाकर जागरूक करने के साथ ही अभिभावकों को भी निगाह रखने की आवश्यकता है।
एडवोकेट तान्या नलवाया ने बताया कि कई कानून 25 साल पहले के चल रहे हैं। जो वर्तमान परिवेश में सही नहीं है। इनमें संशोधन की आवश्यकता है। अपराधियों पर पैनल्टी और सजा बढ़ाने की जरूरत है। पुलिस को अपराधियों से आगे की तकनीक मिलें।
वर्षा वोहरा ने कहा कि सरकारी और गैर सरकारी विभागों में महिला अपराध रोकने के लिए बनाई गई कमेटियों की भी मॉनिटरिंग होनी चाहिए। कई बार ये कागजों में ही दिखाई देती है। कार्यालयों में शिकायत होने पर तुरंत एक्शन लिया जाना चाहिए।
बिंदु रावत ने कहा कि स्कूलों और कॉलेज में छात्राओं को अनिवार्य रूप से आत्मरक्षा के गुर सिखाए जाए। संस्थाओं के माध्यम से महिलाओं को भी ट्रेनिंग दी जाए। अपराधों से बचने के लिए समय-समय पर जागरुकता अभियान चलाए जाए।
मीना खंडेलवाल ने कहा कि नौकरी करने वाली महिलाओं से तय समयानुसार काम लेना चाहिए। देरी होने पर कंपनी को महिला को घर तक छोड़ने की व्यवस्था की जानी चाहिए। मुख्य मार्गों के अलावा सुनसान जगहों पर भी पुलिस गश्त होनी चाहिए।
काजल सोनी ने कहा कि महिलाओं को अपनी बॉडी लेंग्वेज और मन से दृढ़ होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो उन्हें कभी तकलीफ नहीं होगी। किसी प्रकार की समस्या होने पर आवाज उठाने की हिम्मत महिला को ही दिखानी होगी। इसके बाद दूसरे उसका साथ देंगे।
बेबी साहू ने कहा कि कुछ समय पहले लड़कियों और महिलाओं को घूंघट निकालने में परेशानी होती थी। अब मुंह पर स्कार्फ बांधकर चलती है। बदलते परिवेश में भारतीय संस्कृति को भुलाया जा रहा है। ऐसे में परिजनों की निगरानी जरूरी है।
मंजू सेन ने कहा कि महिलाओं की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो। किसी भी प्रकार से कानून का अनर्गल लाभ उठाने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान हो। अभिभावकों को पुत्र और पुत्रियों को समान रूप से परवरिश देनी चाहिए।
हेमा नाथ ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं के लिए सुविधाघर की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ ही नियमित रूप से मनचलों पर कार्रवाई हो। महिलाओं की शिकायत पर तुरंत एक्शन लेने के साथ ही शिकायत निवारण की समय सीमा तय हो।