Emotional Story: कभी-कभी इंसान के अपने ही उसे उस मोड़ पर छोड़ देते हैं, जहां जीवन तो चल रहा होता है लेकिन अपनापन खत्म हो जाता है। ऐसे ही हालात में जी रहे कमलेश की कहानी सिर्फ एक मौत की खबर नहीं, बल्कि उस टूटे रिश्ते की दास्तां है जहां खून के रिश्ते दूर हो गए और दोस्त आखिरी उम्मीद बनकर साथ खड़े रहे। हालांकि, कमलेश की अंतिम इच्छा अधूरी रह गई।

उदयपुर। कभी-कभी जिंदगी किसी इंसान को इतना अकेला कर देती है कि अपने भी पराए हो जाते हैं और पराए ही अपना फर्ज निभाने लगते हैं। शहर के कमलेश अग्रवाल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। परिवार से ठुकराए गए कमलेश ने सड़क पर संघर्ष करते हुए जिंदगी काटी, लेकिन आखिरी सांस तक उसका साथ उसके दोस्तों ने नहीं छोड़ा। विडंबना यह रही कि जिन दोस्तों ने उसे जीते-जी सहारा दिया, वे उसकी अंतिम यात्रा में भी शामिल नहीं हो सके।
राजेंद्र नगर गायरियावास निवासी कमलेश अग्रवाल को परिजनों ने दिसम्बर 2025 में घर से बेदखल कर दिया। आरोप था कि वह परिजनों के कहने में नहीं था। सिर पर छत नहीं रही तो उसने फुटपाथ, सार्वजनिक स्थल और खुले आसमान तले रातें बिताईं। जीवन की गाड़ी किसी तरह आगे बढ़े, इसके लिए उसके दोस्त राहुल सालवी, दिलीप कृष्णावत, हितेष सालवी, काव्य वसीटा ने मदद का हाथ बढ़ाया। उन्होंने कमलेश को एक बाइक उपलब्ध करवाई और रेपिडो की आईडी दिलवाई, ताकि वह राइडिंग कर अपना गुजारा कर सके।
कमलेश ने हालात से हार नहीं मानी और जैसे-तैसे जिंदगी को संभालने की कोशिश करता रहा। लेकिन, कुछ समय बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। बीमारी ने उसे इतना कमजोर कर दिया कि काम करना भी मुश्किल हो गया। ऐसे मुश्किल दौर में भी दोस्तों ने उसे अकेला नहीं छोड़ा। वे उसे अस्पताल लेकर पहुंचे और इलाज की व्यवस्था करवाई। खाने से लेकर हर जरूरत के लिए दोस्त साथ थे। कई दिनों तक उपचार चलता रहा, लेकिन आखिरकार कमलेश जिंदगी की जंग हार गया।
मौत के बाद परिजनों को सूचना दी गई, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। ऐसे में शव को लावारिस मानते हुए उदयपुर के मुर्दाघर में रखवाया गया। इस दौरान भी दोस्त उसके साथ खड़े रहे। वे कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर स्वयं अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर रहे थे। उनका मानना था कि जब जीवन के सबसे कठिन दिनों में वे कमलेश के साथ रहे, तो अंतिम विदाई भी वे ही देंगे। लेकिन, इसी बीच परिजन मुर्दाघर पहुंचे और दोस्तों को बताए बिना शव लेकर चले गए।
अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हो पाने की घटना दोस्तों के लिए गहरा भावनात्मक आघात बन गई। दोस्त राहुल सालवी ने बताया कि उनका दर्द सिर्फ एक दोस्त को खोने का ही नहीं था, बल्कि इस बात का भी था कि जिसे उन्होंने मुश्किल वक्त में सहारा दिया, उसकी अंतिम यात्रा में वे कंधा तक नहीं दे सके। जबकि, परिजन दोस्तों के बारे में जानते थे।
कमलेश ने मौत से पहले बनाए गए वीडियो में अपने जीवन की पीड़ा बयां की थी। वीडियो में उसने परिवार से दूरी और उपेक्षा का जिक्र किया। यह भी कहा कि मेरी मौत हो जाए तो दोस्त ही अंतिम संस्कार करें। दोस्तों का कहना है कि उस वीडियो में एक ऐसे इंसान का दर्द झलकता है, जो अपनों के बीच रहकर भी पूरी तरह अकेला हो चुका था। लेकिन उसकी अंतिम इच्छा भी पूरी नहीं हो सकी।