फिर बिगड़ी एक कर्मचारी की तबियत, दो साल में दर्जनों कर्मचारी पहुंचे चुके अस्पताल, कक्ष की चॉबी नहीं मिलने और छुट्टी पर गए कर्मचारी की लगाई डांट
उज्जैन. विक्रम विश्वविद्यालय कुलपति प्रो.शीलसिंध पांडे की फटाकर से एक बार फिर एक कर्मचारी का स्वास्थ्य स्वास्थ्य बिगड़ गया। शुक्रवार को अलग-अलग कारणों से कुलपति के निशाने पर कई कर्मचारी आ गए। इसमें कर्मचारी कैलाश को कक्ष की चॉबी नहीं मिलने के लिए फटकारा। वहीं ड्रायवर अमित यादव के कई दिनों से अवकाश पर होने के कारण कुलपति की कहासुनी हो गई। इसी विवाद के बाद अमित यादव के स्वास्थ्य बिगड़ गया।
गेट में लगी चॉबी, तलाशते रहे सभी
विक्रम विवि कुलपति शुक्रवार को उज्जैन से बाहर गए थे। दोपहर 3 बजे विवि प्रशासनिक कार्यालय पहुंचे। तो द्वार पर ताला लगा हुआ था। कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी चॉबी तलाशते रहे, लेकिन चॉबी नहीं मिली। इसके बाद कुलपति ने सब को जमकर डांटा, लेकिन थोड़ी देर बाद कुलपति ने बताया कि जिस चॉबी को तलाश रहे हो, वह द्वार में ही लगी हुई है। यह देख कर्मचारी कैलाश ने तत्काल कक्ष खोल दिया। थोड़ी देर बाद ड्रायवर अमित यादव कक्ष में पहुंच गया। यहां पर कुलपति और अमित की छुट्टी को लेकर बहस हो गई।
कोई नहीं ड्रायवर बनने को तैयार
विवि में कुलपति का ड्रायवर व बंगले पर ड्यूटी देने के लिए कोई तैयार नहींं है। अमित भी दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी है और गोपनीय विभाग में पदस्थ हुआ। अमित का मस्टर भी ड्रायवर का नहीं है। साथ ही कुशल ड्रायवर की पात्रता भी नहीं रखता है, लेकिन जब कोई ड्रायवर नहीं मिला। तो गोपनीय समन्वयक बीके मेहता ने अमित के नाम का सुझाव दे दिया बता दे कि निजी वाहन एंजेसी ने भी विश्वविद्यालय को बिना ड्रायवर का वाहन देने की बात कही। दरअसल, कुछ वाहन विश्वविद्यालय ने ठेके पर लगा रखे है।
कुलपति की डांट से कई पहुंचे अस्पताल
विक्रम विवि में कुलपति की डांट से स्वास्थ्य बिगडऩे वालों की लिस्ट काफी बड़ी है। सबसे पहले गोपनीय विभाग में पदस्थ खले भर्ती हुए। इसके बाद डांट और फटकार आम और हर दिन की बात हो गई। कई बार विद्यार्थी, छात्रसंगठनों, महिला कर्मचारी व प्रोफेसरों तक से बहस हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य बिगडऩे वालों उपकुलसचिव डीके बग्गा, पूर्व कुलसचिव सुभाषचंद्र आर्य, बंगले पर पदस्थ खाना बनाने वाला कुलपति की डांट से अस्पताल तक पहुंच चुके है।
यह भी है बड़े विवाद