
Bajrang Dal Protest- मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है। महाकाल मंदिर में वीआईपी कल्चर को लेकर लगातार सवाल उठ रहे है। अब महाकालेश्वर मंदिर की वीआईपी दर्शन व्यवस्था (Mahakal Temple VIP Darshan) को लेकर मंगलवार को एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई। एक ओर बजरंग दल के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मंदिर परिसर में प्रदर्शन कर वीआईपी कल्चर खत्म करने और सभी श्रद्धालुओं के लिए समान दर्शन व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई, वहीं दूसरी ओर मंदिर प्रशासन से जुड़े सूत्रों ने दावा किया कि विरोध करने वाले संगठन के नाम पर ही पिछले छह महीनों में हजारों निःशुल्क दर्शन कराए गए, जिससे मंदिर को करीब 29 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ।
वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर मंगलवार को विवाद गहरा गया। बजरंग दल के सैकड़ों कार्यकर्ता मंदिर के निर्माल्य द्वार पर पहुंचे और वीआइपी कल्चर के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि आम श्रद्धालुओ को घंटों लंबी कतारो और तेज धूप में इंतजार करना पड़ता है, जबकि प्रभावशाली लोगों को सीधे और तत्काल प्रवेश देकर दर्शन कराए जाते है। इसे धार्मिक असमानता बताते हुए कार्यकर्ताओं ने मंदिर प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर श्रद्धालुओ के लिए समान और निष्पक्ष दर्शन व्यवस्था की मांग की। विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री जसवंत सिंह ठाकुर ने कहा मंदिर की व्यवस्था चरमरा चुकी है और वीआईपी संस्कृति समाप्त किए बिना आम श्रद्धालुओ को न्याय नहीं मिल सकता।
प्रदर्शन के बीच मंदिर प्रशासन से जुड़े सूत्रों ने छह माह के रिकॉर्ड के आधार पर अलग ही तस्वीर सामने रखी। सूत्रों के अनुसार, वीआईपी व्यवस्था का विरोध करने वाले संगठन के नाम अब कई सवाल उठ रहे है। मंदिर सूत्रो का कहना है कि एक ओर वीआईपी संस्कृति समाप्त करने की मांग उठाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर मुफ्त दर्शन सुविधा का बड़े पैमाने पर लाभ भी लिया गया। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या विरोध और व्यवहार में विरोधाभास है, या फिर एफओसी पास जारी करने की प्रक्रिया पर ही पारदर्शिता और जवाबदेही तय किए जाने की जरूरत है।