Monsoon Care Tips: मानसून सीजन में खराब पानी के उपयोग से अधिक बीमारियां होती हैं। दूषित जल के सेवन से टाइफाइड पीलिया, डायरियों, पैचिस और हेजा जैसी बीमारियां भी फैलती है।
Monsoon Care Tips: मानसून सीजन में खराब पानी के उपयोग से अधिक बीमारियां होती हैं। दूषित जल के सेवन से टाइफाइड पीलिया, डायरियों, पैचिस और हेजा जैसी बीमारियां भी फैलती है। इसलिए भोजन बनाने मे व पीने में शुद्ध उबले हुए पानी का उपयोग करना चाहिए। सीएमएचओ डॉ. अशोक पटेल ने बताया, बारिश में शुद्ध पेयजल की समस्या बढ़ जाती है। पानी और अस्वच्छता से फैलने वाली बीमारियों में प्रमुख रुप से दस्त/कृमि संक्रमण/त्वचा और आखों के रोग / मच्छरों ओर मक्खियों से फैलने वाले रोग शामिल हैं। इसलिए कुछ भी खाने के पहले व शौच के बाद साबुन से हाथ अवश्य धोएं।
दूषित पानी के कारण दस्त रोग फैलता है। बच्चों में यह अधिक गंभीर रूप धारण कर सकता है। शरीर में से पानी निकल जाने से बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है।
रोकथाम: शुद्ध पेयजल व शुद्ध भोजन का उपयोग करें। सड़े गले फल, खाद्य पदार्थों का उपयोग ना करें। खाना खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से जरूर हाथ धोएं। खुले में शौच ना करें। आसपास साफ सफाई रखे। दस्त लगने पर ओआरएस व जिंक सल्फेट गोली का उपयोग चिकित्सक की सलाह अनुसार करे। खाने-पीने की वस्तुओं को ढंक कर रखें। मक्खीयों से बचाव करें। हरी सब्जी और फलों का उपयोग करने के पहले साफ पानी से धोकर उपयोग करे।
बहुत से लोगो को आंखों के रोग हो जाते हैं। आंखो में खुजली व लाल हो जाती है। आंख चिपचीपी हो जाती है सफेद और पिले रंग का पदार्थ जमा हो जाता है। इस रोग को आई फ्लू, कंजक्टिवाईटिस, या आखें आना के रूप में जाना जाता है।
रोकथाम- कंजेक्टिवाइटिस का संक्रमण आपसी संपर्क के कारण फैलता है। इस रोग का वायरस संक्रमित मरीज के उपयोग की किसी भी वस्तु जैसे, रूमाल, तौलिया, टॉयलेट की टॉटी, दरवाजे का हैंडल, टेलीफोन के रिसीवर से दूसरों तक पहुंचता है, कम्प्यूटर का की बोर्ड भी इसे फैलाने में सबसे बड़ा सहायक साबित होता है। आंखें आने पर बार-बार अपने हाथ व चेहरे को ठंडे पानी से धोएं। परिवार के सभी सदस्य अलग-अलग तोलिये आदि का उपयोग करें। बार-बार आंखों को हाथ ना लगाएं। धूप के चश्मे का प्रयोग करे, चिकित्सक को दिखाएं।
इस सीजन मलेरिया / डेंगू रोग भी फैलता है। प्राय: बरसात के दिनों में जल जमा हो जाता है जो खेत, तालाब, गड्डे, खाई, घर के आस पास रखे हुवे टुटे फुटे डब्बे, पुराने टायर, पशु के पानी पिने का होद इत्यादि। इस प्रकार के भरे हुवे पानी में प्राय: मच्छर के लार्वा पैदा होते है जो बाद में मच्छर बनकर रोग फैलाते है।
रोकथाम- मलेरिया से बचाव के लिए घर के आसपास जल जमा ना होने दें। रूके हुवे पानी में मिट्टी का तेल या जला हुवा आईल डाले। कूलर, फुलदान, फ्रिज ट्रे आदि को सप्ताह में एक बार अवश्य साफ करे। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। किट नाशक का छिडकाव करवाये, मलेरिया रोग हो जाने पर खून की जांच अवश्य कराएं व चिकित्सक की सलाह से पूर्ण उपचार ले।